Narnaul: श्रीमद्भागवत साक्षात् नारायण का स्वरूप हैं और मुक्ति प्रदाता है
Narnaul: गांव दुलोठ जाट मे संगीतमय श्रीमदभागवत कथा के द्वितीय दिवस मार, प्रवीण कुमार एवं समस्त परिवार द्वारा सर्वप्रथम मुख्य यजमान राकेश कुमार , सुरेश कुमार, महिपाल सिंह, अशोक, आचार्य मनीष शास्त्री एवं पं यश शर्मा, पं गोपेश शर्मा ने विधि-विधान से श्री गणपति पूजन, कलश और नवग्रह तथा षोडश मातृका और पितरों का पूजन करवाया और सभी कलशों सहित ठाकुर जी का भी पूजन किया गया गया।
भागवत आचार्य पंडित बजरंग शास्त्री ने भागवत कथा में बताया श्रीमदभागवत साक्षात नारायण का स्वरूप है और मुक्ति प्रदाता है और भागवत के आरम्भ में सबसे पहले सत्य को प्रणाम किया गया है, क्योंकि सत्य में ही राम है, सत्य में ही कृष्ण है और सत्य में ही शिव है। इसलिये लिखा गया है सत्यम शिवम सुंदरम।
आचार्य जी ने बताया की घर परिवार का पालन पोषण करना हमारा धर्म है , लेकिन हमारी हर एक श्वास में प्रभु का नाम स्मरण होता रहे, यही मानव जीवन का परम धर्म है। हम सभी को विश्वास के साथ निस्वार्थ भक्ति ही करनी चाहिये। क्योंकि यही मानव जीवन का परम धर्म है।
आचार्य जी ने बताया भगवान नारायण की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण आरम्भ किया और सर्वप्रथम दस प्रकार की सृष्टि वर्णन किया। उसके उपरांत ब्रह्मा जी ने अपने शरीर से सृष्टि के पहले पुरुष मनु और स्त्री शतरूपा को महारानी को प्रकट किया। कथा के अंत में श्री शुकदेव जी एवं परीक्षित जी की सुंदर झांकी भी दिखाई, जिसका सभी ने पूजन किया।
आचार्य जी ने कथा मे कहा की मनुष्य को अपने घर और समाज के कार्य करते हुए प्रभु का नाम स्मरण एवम पुण्य के कार्य भी अवश्य करते रहने चाहिये वो व्यक्ति धन्य होता है जो प्रभु का नाम स्मरण करता है और करवाता है।
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