Diabetes Wound Healing Care: डायबिटीज में छोटी सी चोट भी क्यों बन जाती है जानलेवा? जानें एक्सपर्ट डॉक्टर की चेतावनी
डायबिटीज में छोटी सी चोट भी क्यों बन जाती है जानलेवा?
Diabetes Wound Healing Care: डायबिटीज यानी मधुमेह अब सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवनशैली से जुड़ी स्थिति बन चुकी है जो शरीर के अन्य प्रमुख अंगों को भी धीरे-धीरे प्रभावित करने लगती है। हाई ब्लड शुगर से जूझ रहे लोगों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि उनके शरीर का कोई भी घाव या कट आसानी से नहीं भरता। अक्सर देखा गया है कि जब किसी डायबिटिक मरीज की सर्जरी होनी होती है, तो डॉक्टर सबसे पहले इंसुलिन या दवाओं के जरिए उनका शुगर लेवल नियंत्रित करते हैं।
दरअसल, जब शरीर में लंबे समय तक शुगर का स्तर बढ़ा रहता है, तो यह रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को सख्त और संकरा बना देता है। इसके चलते चोट या घाव वाली जगह तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन, रक्त और आवश्यक पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते, जिससे त्वचा की खुद को हील (ठीक) करने की गति बहुत धीमी पड़ जाती है। इसके अलावा, हाई ब्लड शुगर हमारी इम्युनिटी यानी सफेद रक्त कोशिकाओं (WBCs) की बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता को भी पंगु बना देता है।
एक्सपर्ट की राय: ‘पैरों की डेली चेकिंग और साफ-सफाई बेहद जरूरी’
नोएडा स्थित कैलाश अस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. राहुल पराशर बताते हैं कि “डायबिटीज के मरीजों में नसों की संवेदनशीलता (Sensitivity) कम हो जाती है, जिसके कारण छोटी चोट या कट का अहसास तुरंत नहीं हो पाता। जब तक मरीज का ध्यान जाता है, तब तक इन्फेक्शन फैल चुका होता है। इसलिए मरीजों को रोजाना अपने पैरों और तलवों की जांच करनी चाहिए।”
डॉ. पराशर के अनुसार, यदि पैर में कोई छोटा फफोला, छाला या दाना हो जाए, तो उसे खुद से फोड़ने या उकेरने की गलती कभी न करें। इससे इन्फेक्शन तेजी से फैल सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।
इन बातों का रखें खास ख्याल, ताकि सुरक्षित रहे स्किन
घाव को हमेशा साफ और ढककर रखें:
यदि किसी कारणवश हल्की चोट लग जाए, तो घाव को एंटीसेप्टिक से साफ करें और सूखी, साफ पट्टी से ढक दें। घाव को खुला रखने से हवा में मौजूद बैक्टीरिया इन्फेक्शन को बढ़ा सकते हैं। साथ ही, घाव को पानी और धूल-मिट्टी से बचाना बहुत जरूरी है।
घर के अंदर भी नंगे पैर न घूमें:
यद्यपि डायबिटीज के मरीजों को हरी घास पर टहलने की सलाह दी जाती है, लेकिन कंकड़ या नुकीली चीजों से चोट लगने का जोखिम हमेशा बना रहता है। मरीजों को हमेशा घर के अंदर और बाहर मुलायम स्लीपर (चप्पल) पहनकर ही रहना चाहिए।
दाने और फफोले फोड़ने की भूल न करें:
अक्सर चेहरे, हाथ या पैर पर छोटे-मोटे दाने या फफोले (Blisters) निकल आते हैं। डायबिटीज के मरीजों को इन्हें दबाकर फोड़ने से बचना चाहिए, क्योंकि यह छोटा सा दाना एक बड़े नासूर (Ulcer) का रूप ले सकता है।
गलत दवाओं या रसायनों के इस्तेमाल से बचें:
चोट पर घरेलू नुस्खे आजमाने या सीधे हाइड्रोजन पेरोक्साइड लगाने से बचें, क्योंकि यह नए बन रहे ऊतकों (Tissues) को नुकसान पहुंचा सकता है। हमेशा डॉक्टर द्वारा सुझाई गई एंटीबायोटिक क्रीम ही लगाएं और इस बात पर नजर रखें कि घाव में पस (मवाद) तो नहीं पड़ रहा।
शुगर लेवल को रखें लगातार कंट्रोल:
घाव को जल्दी सुखाने का सबसे पहला नियम यही है कि आपका ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहे। दवाएं समय पर लें, सही डाइट प्लान फॉलो करें और समय-समय पर ग्लूकोमीटर से अपनी शुगर चेक करते रहें।
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