October 1, 2026

Jitiya Vrat Date: 2 अक्टूबर से शुरू होगा 36 घंटे का महाव्रत, जानें नहाय-खाय और पारण का सही समय

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Jitiya Vrat Date: 2 अक्टूबर से शुरू होगा 36 घंटे का महाव्रत, जानें नहाय-खाय और पारण का सही समय

2 अक्टूबर से शुरू होगा 36 घंटे का महाव्रत, जानें नहाय-खाय और पारण का सही समय

Jitiya Vrat Date: मातृत्व के स्नेह, अटूट समर्पण और संतान की रक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला जीवितपुत्रिका यानी जितिया व्रत इस वर्ष अक्टूबर के पहले सप्ताह में पड़ रहा है। (Jivitputrika Vrat 2026 Schedule) द्रिक पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह निर्जला उपवास रखा जाता है।

मुख्य रूप से उत्तर भारत, बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के क्षेत्रों में पूरे विधि-विधान से मनाया जाने वाला यह पर्व कुल तीन दिनों तक चलता है, जिसमें माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए 36 घंटे तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए तपस्या करती हैं।

तीन दिवसीय अनुष्ठान की तिथियां और नियम Jitiya Nahay Khay Date 2026

पहला दिन (सप्तमी तिथि – नहाय-खाय): 2 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार)

जितिया व्रत का आगाज 2 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ होगा। इस दिन सुबह स्नान-ध्यान के बाद पूजा स्थल और घर की सफाई की जाती है। दोपहर में महिलाएं सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। परंपरा के अनुसार, इस दिन मड़ुआ (रागी) की रोटी, नोनी का साग और कंदा जैसी पारंपरिक चीजें खाई जाती हैं।

दूसरा दिन (अष्टमी तिथि – मुख्य निर्जला व्रत): 3 [अक्टूबर] 2026 (शनिवार)

यह व्रत का मुख्य दिन होता है। तड़के सूर्योदय से पहले ओठगन (सरगही) के तहत मीठा भोजन या फल ग्रहण किया जाता है, जिसके बाद से 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है। इस दिन शाम को माताएं एकत्र होकर राजा जीमूतवाहन की कुशा से बनी प्रतिमा की पूजा करती हैं और जितिया व्रत की प्रामाणिक कथा सुनती हैं।

तीसरा दिन (नवमी तिथि – पारण): 4 अक्टूबर 2026 (रविवार)

व्रत का समापन 4 अक्टूबर को होगा। (Jitiya Vrat Upay for Child Career) सुबह सूर्योदय के समय भगवान भास्कर को अर्घ्य देने और राजा जीमूतवाहन की अंतिम पूजा-अर्चना के बाद माताएं पारंपरिक पकवान बनाकर व्रत का पारण करेंगी।

संतान की तरक्की व सुरक्षा के लिए करें ये विशेष उपाय

शास्त्रों में जितिया व्रत के पावन अवसर पर संतान के मंगल के लिए कुछ विशेष और अचूक उपायों का उल्लेख किया गया है:

नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा का उपाय: व्रत की रात अपने घर के मुख्य द्वार पर आटे का चौमुखी दीपक जलाएं। ध्यान रखें कि दीपक में केवल तिल के तेल का प्रयोग करें और इसे सीधे जमीन पर रखने के बजाय किसी पवित्र थाली या चावल की ढेरी पर स्थापित करें। यह उपाय बच्चों को बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रखता है।

करियर व पढ़ाई में सफलता के लिए: यदि बच्चे की शिक्षा या करियर में लगातार बाधाएं आ रही हों, तो व्रत के दिन घर की उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में शुद्ध देसी घी का दीपक प्रज्वलित करें। वास्तु में यह दिशा बुद्धि, ज्ञान और सकारात्मकता का केंद्र मानी गई है। दीपक जलाते हुए बच्चे की उज्ज्वल भविष्य की कामना करें।

दीर्घायु और आरोग्य के लिए: जितिया के दिन माताएं गंगाजल मिले जल से स्नान करें। (Ashwin Krishna Ashtami Jitiya) स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें और ‘संतान गोपाल मंत्र’ का श्रद्धापूर्वक जप करें। मान्यता है कि इससे संतान को निरोगी काया और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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