Sangrur brick kiln workers protest : संगरूर DC दफ्तर के बाहर भट्ठा मजदूरों के पक्का मोर्चे को 3 महीने पूरे
Sangrur brick kiln workers protest : संगरूर DC दफ्तर के बाहर भट्ठा मजदूरों के पक्का मोर्चे को 3 महीने पूरे
Sangrur brick kiln workers protest : भट्ठा मजदूरों के कानूनी अधिकारों और उन्हें तय सरकारी मजदूरी दरें लागू करवाने की मांग को लेकर संगरूर में चल रहा आंदोलन अब आर-पार की लड़ाई के मोड़ पर पहुंच गया है। किसान मजदूर एसोसिएशन पंजाब के झंडे तले जिला मुख्यालय (डिप्टी कमिश्नर कार्यालय) के बाहर लगाया गया पक्का मोर्चा सोमवार को 3 महीने पूरे कर गया। 90 दिनों से लगातार जारी इस धरने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई हल न निकलने से भट्ठा मजदूरों और उनके परिवारों में गहरा आक्रोश है।
सीजन शुरू होने पर भी श्रम विभाग की चुप्पी, वादे से मुकरा प्रशासन
मोर्चे को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के जिला प्रधान दिलावर खां ने कहा कि तीन महीने पहले जब यह संघर्ष शुरू हुआ था, तब संगरूर के सहायक श्रम आयुक्त (ALC) ने आश्वासन दिया था कि भट्ठों का नया सीजन शुरू होते ही श्रम विभाग, भट्ठा मालिक और मजदूर प्रतिनिधियों को एक मेज पर बैठाकर कानूनी दरों को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
दिलावर खां ने आरोप लगाया कि अब जिलों में भट्ठों का सीजन पूरी तरह शुरू हो चुका है, लेकिन सहायक श्रम आयुक्त या श्रम विभाग का कोई भी अधिकारी इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है। प्रशासन की इस बेरुखी के कारण मजदूर 90 दिनों से खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर हैं, जबकि विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।
लहरागागा, मूनक और जखेपल में काम ठप; ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर आंदोलन तेज
आंदोलन की आगामी रणनीति का खुलासा करते हुए संगठन के प्रदेश प्रधान कुलदीप सिंह नीतू कोट धर्मू ने स्पष्ट किया कि जब तक भट्ठा मजदूरों को उनकी बनती सरकारी मजदूरी दरें लिखित रूप में लागू नहीं की जातीं, तब तक मजदूर काम पर नहीं लौटेंगे।
उन्होंने बताया कि पक्की हड़ताल के आह्वान के तहत जिला संगरूर के प्रमुख भट्ठा क्षेत्रों जैसे लहरागागा, मूनक और जखेपल में मजदूरों ने अपनी-अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां एक जगह खड़ी कर दी हैं और काम पूरी तरह बंद कर दिया है। मजदूरों का कहना है कि यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक भट्ठा मालिकों और मजदूरों के बीच रेट को लेकर चल रहा विवाद कानूनी रूप से सुलझा नहीं लिया जाता।
कानूनी दरों और अधिकारों की गारंटी की मांग
मजदूर नेताओं ने दोटूक कहा कि वे किसी भी गैर-कानूनी मांग को लेकर संघर्ष नहीं कर रहे, बल्कि सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी दरों को ही लागू करने की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की कि भट्ठा मालिकों को कानून के दायरे में लाकर सरकारी रेट लागू करवाए जाएं और मजदूरों के श्रम अधिकारों की पूर्ण गारंटी सुनिश्चित की जाए।
