Karnal Youth Dies USA: 45 लाख का कर्ज और डंकी का खौफनाक सफर, अमेरिका में 21 साल के अनिल की हार्ट अटैक से मौत
45 लाख का कर्ज और डंकी का खौफनाक सफर, अमेरिका में 21 साल के अनिल की हार्ट अटैक से मौत
Karnal Youth Dies USA: हरियाणा के करनाल जिले से अवैध रास्तों यानी ‘डंकी रूट’ के जरिए विदेश जाने के शौक और मजबूरी का एक और दर्दनाक अंत सामने आया है। असंध थाना क्षेत्र के बल्लाह गांव निवासी 21 वर्षीय युवक अनिल कुमार मान की अमेरिका में अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि 4 अक्टूबर की देर रात अनिल को दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अनिल की मौत की खबर जैसे ही उसके गांव पहुंची, पूरे इलाके में मातम छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
अनिल अपने पिता ऋषिपाल का इकलौता बेटा था। इतना ही नहीं, ऋषिपाल के भाई रामपाल की भी केवल एक बेटी है, जिसके चलते अनिल अपने पूरे कुनबे का इकलौता चिराग और सहारा था। दो परिवारों की उम्मीदें अनिल के कंधों पर ही टिकी हुई थीं। 10वीं कक्षा पास करने के बाद अनिल ने परिवार की आर्थिक तंगी दूर करने और अपने भविष्य को संवारने के लिए अमेरिका जाने का सपना देखा था।
45 लाख का कर्ज और जमीन बेचकर भेजा था अमेरिका
अनिल के अमेरिका पहुंचने के पीछे की कहानी बेहद संघर्षपूर्ण और जोखिम भरी रही है। पिता ऋषिपाल ने बेटे के सुनहरे भविष्य की खातिर अपनी कृषि भूमि बेच दी और रिश्तेदारों व साहूकारों से भारी कर्ज भी लिया। करीब 45 लाख रुपये का इंतजाम करके अनिल को खतरनाक और अवैध ‘डंकी मार्ग’ से अमेरिका के लिए रवाना किया गया था। कई महीनों के खौफनाक और मुश्किल भरे सफर के बाद जब अनिल अमेरिका पहुंचा और वहां धीरे-धीरे खुद को स्थापित कर रहा था, तभी इस अनहोनी ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।
3 अक्टूबर तक अनिल की अपने परिवार से फोन पर बात हुई थी और वह पूरी तरह से स्वस्थ था। लेकिन 4 अक्टूबर की रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और साइलेंट अटैक ने उसकी जान ले ली। जिस बेटे के अमेरिका पहुंचते ही परिवार अपनी गरीबी और कर्ज के दिन भूलने की उम्मीद लगाए बैठा था, आज उस घर में सिर्फ चीख-पुकार और सन्नाटा पसरा हुआ है।
अंतिम दर्शन के लिए तरस रहे परिजन, सरकार से लगाई गुहार
हादसे के बाद से ही बल्लाह गांव में शोक की लहर है और आसपास के ग्रामीण पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं। हालांकि, परिवार के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती अनिल के पार्थिव शरीर को भारत वापस लाना है। अनिल के पिता और परिजनों के पास अब इतने वित्तीय संसाधन नहीं बचे हैं कि वे अमेरिका से शव को एयरलिफ्ट कराने का भारी-भरकम खर्च खुद उठा सकें।
रोते-बिलखते माता-पिता ने केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और हरियाणा सरकार से मार्मिक अपील की है। परिवार ने गुहार लगाई है कि प्रशासनिक और कूटनीतिक स्तर पर मदद करके उनके बेटे का शव जल्द से जल्द भारत मंगवाया जाए, ताकि वे अपने इकलौते चिराग का अंतिम बार चेहरा देख सकें और हिंदू रीति-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार कर सकें।
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