October 5, 2026

इंडिगो यात्रियों को झटका: 6 अक्टूबर से बढ़ेगा फ्यूल चार्ज, 6 महीने में तीसरी बार बढ़ोतरी

0
इंडिगो यात्रियों को झटका: 6 अक्टूबर से बढ़ेगा फ्यूल चार्ज, 6 महीने में तीसरी बार बढ़ोतरी

इंडिगो में कल से सफर महंगा

IndiGo ticket price: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो से सफर करने वाले यात्रियों के लिए मंगलवार से हवाई यात्रा का खर्च बढ़ जाएगा। एयरलाइन ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल चार्ज बढ़ाने का फैसला किया है। नई दरें 6 अक्टूबर की रात 12:01 बजे से लागू होंगी। नई व्यवस्था के तहत घरेलू उड़ानों में रूट और दूरी के हिसाब से यात्रियों से अधिकतम ₹1,300 तक अतिरिक्त फ्यूल चार्ज लिया जाएगा। वहीं इंटरनेशनल फ्लाइट्स में यह अतिरिक्त शुल्क ₹10,000 तक पहुंच सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर टिकट पर इतनी ही रकम बढ़ेगी, बल्कि चार्ज उड़ान की दूरी और रूट के अनुसार अलग-अलग होगा। इंडिगो ने कहा है कि फ्यूल चार्ज में बढ़ोतरी का मुख्य कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमतों में लगातार हुई बढ़ोतरी है। एयरलाइन ने छह महीने के भीतर तीसरी बार यह चार्ज बढ़ाया है। इससे पहले 14 मार्च और फिर 1 अप्रैल को फ्यूल सरचार्ज में बदलाव किया गया था।

 

 

1 अक्टूबर से जेट फ्यूल ₹16 महंगा, तीन महीने में ₹27.28 की बढ़ोतरी

इंडिगो के फ्यूल चार्ज बढ़ाने के पीछे सबसे बड़ा कारण हाल के महीनों में ATF की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है। 1 अक्टूबर से घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF की कीमत ₹121 से बढ़कर करीब ₹137 प्रति लीटर हो गई है। यानी सिर्फ एक महीने में जेट फ्यूल करीब ₹16 प्रति लीटर महंगा हुआ, जो लगभग 13.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। पिछले तीन महीनों में जेट फ्यूल की कीमत में लगातार इजाफा हुआ है। अगस्त 2026 में ATF करीब ₹5 प्रति लीटर महंगा हुआ था। सितंबर में इसमें ₹6.28 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई और अक्टूबर में कीमत ₹16 प्रति लीटर बढ़ गई। इस तरह तीन महीनों में कुल बढ़ोतरी करीब ₹27.28 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।

इंडिगो के मुताबिक पिछले एक महीने में ही जेट फ्यूल की कीमत 14 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है। बढ़ती कीमतों का सीधा असर एयरलाइंस की ऑपरेटिंग कॉस्ट पर पड़ता है, क्योंकि विमान संचालन में ईंधन सबसे बड़े खर्चों में शामिल है। यही वजह है कि एयरलाइन कंपनियां ईंधन की लागत बढ़ने पर यात्रियों से फ्यूल सरचार्ज लेने का रास्ता अपनाती हैं। इंडिगो के नए चार्ज का असर मंगलवार से जारी होने वाले टिकटों की कुल कीमत पर दिखाई देगा।

 

 

एयरलाइंस की लागत का बड़ा हिस्सा जेट फ्यूल, बढ़ती कीमतों का असर यात्रियों पर

जेट फ्यूल दुनिया की एयरलाइंस के लिए सबसे बड़े ऑपरेशनल खर्चों में शामिल है। आम तौर पर एयरलाइन की कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट में फ्यूल की हिस्सेदारी करीब 30 से 40 प्रतिशत तक हो सकती है। ऐसे में तेल और ATF की कीमत में अचानक बढ़ोतरी होने पर एयरलाइंस के पूरे वित्तीय गणित पर असर पड़ता है। ईंधन की कीमत बढ़ने का मतलब है कि एक ही विमान को एक रूट पर उड़ाने की लागत पहले की तुलना में ज्यादा हो जाती है। एयरलाइन के सामने लागत को खुद वहन करने, टिकट की कीमत बढ़ाने या अलग से फ्यूल सरचार्ज लगाने जैसे विकल्प होते हैं। इंडिगो ने इस बार अतिरिक्त फ्यूल चार्ज के जरिए बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा यात्रियों पर डालने का फैसला किया है।

हाल के महीनों में केवल भारतीय एयरलाइंस ही ईंधन की बढ़ती लागत से प्रभावित नहीं हुई हैं। दुनिया की कई एयरलाइंस ने भी बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण अपने किराए और वित्तीय अनुमानों की समीक्षा की है। एयर न्यूजीलैंड और क्वांटास जैसी कंपनियों ने भी बढ़ी हुई लागत के असर की बात कही है। यात्रियों के लिए इसका सीधा मतलब है कि हवाई टिकट की कीमत केवल बेस फेयर से तय नहीं होगी। फ्यूल चार्ज बढ़ने के साथ टिकट की अंतिम कीमत में भी इजाफा होगा। खासकर लंबी दूरी की घरेलू और इंटरनेशनल उड़ानों में इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है।

 

 

मिडिल ईस्ट तनाव से तेल और जेट फ्यूल पर दबाव, आम यात्रियों की जेब तक पहुंचा असर

जेट फ्यूल की कीमतों में तेजी के पीछे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी एक बड़ा कारण है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और क्षेत्र में तेल की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता ने ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज रूट से जुड़ी चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। होर्मुज क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। यहां किसी तरह का व्यवधान पैदा होने की आशंका भी अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों पर असर डाल सकती है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर आगे चलकर रिफाइनिंग और जेट फ्यूल की लागत पर भी पड़ता है। यही वजह है कि वैश्विक एविएशन इंडस्ट्री में एयरलाइंस ईंधन लागत को लेकर सतर्क हैं। भारत जैसे देश के लिए इसका असर और अहम हो जाता है क्योंकि घरेलू एयरलाइंस को अपने संचालन के लिए बड़ी मात्रा में एविएशन फ्यूल की जरूरत होती है।

इसी बढ़ती लागत के बीच एयर इंडिया ने भी मार्च में घरेलू उड़ानों पर ₹399 का फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया था। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी ईंधन लागत का असर पड़ा है और विभिन्न रिपोर्टों में भारतीय एयरलाइंस के इंटरनेशनल किराए में बढ़ोतरी की बात सामने आई थी। अब इंडिगो की नई बढ़ोतरी से यात्रियों के लिए हवाई सफर का बजट और बढ़ सकता है। घरेलू उड़ानों पर अधिकतम ₹1,300 और इंटरनेशनल उड़ानों पर ₹10,000 तक अतिरिक्त चार्ज की सीमा तय की गई है। हालांकि वास्तविक चार्ज रूट और दूरी के आधार पर अलग होगा। छह महीने में तीसरी बार फ्यूल सरचार्ज बढ़ने से यह भी साफ है कि एयरलाइंस पर ईंधन लागत का दबाव लगातार बना हुआ है। आने वाले समय में अगर ATF और कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है तो विमानन कंपनियों की लागत और टिकट की कीमतों पर उसका असर देखने को मिल सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed