Ambala Kaithal highway: अंबाला से कैथल के बीच सफर करने वाले हजारों वाहन चालकों के लिए राहत की एक उम्मीद जगी है। पिछले तीन वर्षों से अधर में लटके निर्माण कार्य और खस्ताहाल सड़क से परेशान होकर दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को कड़ा नोटिस जारी किया है। अदालत ने नाराजगी जताते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से सड़क निर्माण में हो रही देरी का पूरा ब्योरा तलब किया है।
3 साल से लटकी है परियोजना, हिचकोले खाने को मजबूर मुसाफिर
हाईकोर्ट के समक्ष दायर याचिका में जमीनी हकीकत बयां करते हुए याची ने बताया कि अंबाला-कैथल मार्ग के चौड़ीकरण और मरम्मत का काम लंबे समय से अटका पड़ा है। करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी स्थिति सुधरने की बजाय बिगड़ती चली गई। राहगीरों को सड़क पर बिखरे मलबे, उड़ती धूल और बड़े-बड़े गड्ढों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे न केवल वाहनों को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि आए दिन हादसों का खतरा भी मंडराता रहता है।
काम अधूरा तो किस हक से वसूल रहे टोल टैक्स?
मामले की सुनवाई के दौरान सबसे तीखा सवाल टोल वसूली को लेकर उठा। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्राधिकरण एक तरफ तो वाहन चालकों को सुरक्षित और सुगम सड़क मुहैया कराने में नाकाम रहा है, वहीं दूसरी तरफ टोल प्लाजा पर जेब ढीली कराने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। याची ने अदालत से गुहार लगाई कि जब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं होता और सड़क चलने लायक नहीं बनती, तब तक टोल वसूली पर रोक लगाई जाए या इस पर स्थिति स्पष्ट की जाए।
प्राधिकरण को देना होगा देरी का हिसाब और सुरक्षा का रोडमैप
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों पर गौर करने के बाद इसे जनहित का गंभीर मुद्दा माना। अदालत ने NHAI को कारण बताने के निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा क्यों नहीं हुआ और अब इसे पूरा करने के लिए क्या डेडलाइन तय की गई है। इसके साथ ही वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की रिपोर्ट भी अदालत में दाखिल करनी होगी। अब सबकी नजरें NHAI द्वारा दायर किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।
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