GRP thana Ambala Cantt: देश के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में शुमार अंबाला कैंट जंक्शन पर यात्रियों की सुरक्षा की कमान संभालने वाले पुलिसकर्मी खुद इस समय भगवान भरोसे हैं। जो खाकी वर्दीधारी 24 घंटे आम जनता की जान-माल की हिफाजत के लिए मुस्तैद रहते हैं, वे खुद एक ऐसे जर्जर और खतरनाक भवन के भीतर कामकाज चलाने को मजबूर हैं, जो किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। स्थिति यह है कि रेलवे ने इन इमारतों को ‘मानव जीवन के लिए पूरी तरह खतरनाक’ करार देते हुए तत्काल खाली करने के फरमान जारी कर दिए हैं।
अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन पर रोजाना औसतन 50 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्टेशन परिसर के पास ही जीआरपी थाना, सीआईए (CIA) स्टाफ कार्यालय और पुलिसकर्मियों के रहने के लिए बैरकों का निर्माण किया गया था। इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो यह रेलवे स्टेशन 1891 में वजूद में आया था, जबकि इसके ठीक दशकों बाद 1954 में यहां जीआरपी थाने की स्थापना हुई थी। शुरुआती दौर में यह पंजाब पुलिस के अधीन था, लेकिन 1 नवंबर 1966 को हरियाणा राज्य के गठन के बाद यह हरियाणा पुलिस के नियंत्रण में आ गया। वक्त बीतने के साथ यह इमारतें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं।
सीनियर सेक्शन इंजीनियर के निरीक्षण में खुला पोल
हाल ही में धुलाई लाइन के पास स्थित इन तमाम सरकारी भवनों का सीनियर सेक्शन इंजीनियर की तकनीकी टीम ने बारीकी से निरीक्षण किया था। इस जांच में सामने आया कि थाने की दीवारें, छतें और पिलर पूरी तरह कमजोर हो चुके हैं और अब यह रहने या बैठने लायक बिल्कुल नहीं बचे हैं। इंजीनियरों की रिपोर्ट के आधार पर रेलवे निर्माण विभाग ने पिछले दिनों यानी 10 अक्टूबर को औपचारिक तौर पर जीआरपी थाना और सीआइए स्टाफ को सख्त नोटिस थमा दिया।
नोटिस में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि इन भवनों को इंसानी इस्तेमाल के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। रेलवे प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए यहां तक कह दिया है कि यदि इस जर्जर इमारत के गिरने से कोई अनहोनी या हादसा होता है, तो उसकी जवाबदेही रेलवे की नहीं होगी, बल्कि सारा जिम्मा जीआरपी और सीआइए स्टाफ का ही होगा।
नया ठिकाना न होने से पसोपेश में खाकी
रेलवे के इस कड़े फरमान के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रातों-रात इस थाने और बैरक को खाली कर दिया जाए, तो पुलिसकर्मी और उनका भारी-भरकम साजो-सामान आखिर कहां शिफ्ट होगा? फिलहाल हरियाणा पुलिस के पास इस परिसर के अलावा दूसरा कोई विकल्प या वैकल्पिक भवन उपलब्ध नहीं है।
इस गंभीर संकट से निपटने के लिए जीआरपी के उच्च अधिकारियों ने तत्काल कदम उठाते हुए डीआरएम (DRM) को आधिकारिक पत्र भेजकर नए भवन के निर्माण की पुरजोर मांग की है। हालांकि, अभी तक रेलवे या प्रशासनिक स्तर पर नए भवन के निर्माण को लेकर कोई ठोस कार्रवाई या काम जमीन पर शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में एक तरफ सिर पर मंडराता हादसों का खतरा है, तो दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था संभालने की बड़ी चुनौती, जिसके बीच पुलिसकर्मी हर पल खतरों के साये में काम करने को विवश हैं।
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