Ambala liquor smuggling case: हरियाणा के अंबाला जिले में फर्जी दस्तावेजों और ई-वे बिल के सहारे चावल के कट्टों के नीचे भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब की तस्करी करने के चर्चित मामले में अदालत ने एक आरोपी छात्र को राहत दी है। पिछले महीने सितंबर से जेल में बंद रोहतक निवासी 23 वर्षीय लॉ स्टूडेंट आकाश की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अंबाला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार बंसल की अदालत ने उसे 50,000 रुपये के जमानती बॉन्ड और इतनी ही राशि की एक जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों और जांच के दायरे में छात्र का इस सनसनीखेज अपराध से कोई सीधा और पुख्ता कनेक्शन स्थापित नहीं हो पाया है।
क्या था पूरा मामला और कैसे खुला राज?
यह हाई-प्रोफाइल मामला 24 अगस्त 2026 को एएसआई विशाल कुमार की शिकायत पर अंबाला कैंट के पड़ाव थाने में दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं जैसे धोखाधड़ी (318(4)), जालसाजी (338), फर्जी रिकॉर्ड तैयार करना (336(3)), कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल (340(2)), आपराधिक षड्यंत्र (61(2)) और हरियाणा आबकारी अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
घटना के दिन पुलिस ने अंबाला कैंट के सेक्टर-34 स्थित हुडा टाउन पार्क के पास खड़े एक संदिग्ध ट्रक (CG04MS9518) को पकड़ा था। जब ट्रक की तलाशी ली गई, तो चावल के छिलकों के नीचे अंग्रेजी शराब की कुल 990 पेटियां (रॉयल स्टैग और इम्पीरियल ब्लू) बरामद हुईं। तस्करों ने पुलिस को चकमा देने के लिए फर्जी इनवॉइस और फर्जी ई-वे बिल तैयार कर रखे थे। इतना ही नहीं, पकड़े गए ट्रक का इंजन नंबर, चेसिस नंबर और नंबर प्लेट भी टेंपर्ड पाई गई थी। पुलिस पूछताछ में सामने आया था कि यह खेप उस राज्य में ले जाई जा रही थी जहां पूर्ण शराबबंदी लागू है यानी बिहार। ट्रक चालक (सह-आरोपी प्रकाश) को इस काम के एवज में 50,000 रुपये भाड़ा मिलने वाला था। इसी मामले में पुलिस ने 8 सितंबर को रोहतक के लॉ छात्र आकाश को भी दबोच लिया था।
अभियोजन पक्ष की दलीलें और बचाव पक्ष का पक्ष
पुलिस और सरकारी वकील ने कोर्ट में तर्क दिया था कि आरोपी आकाश अपने एक अन्य सह-आरोपी साहिल के साथ एक ब्रीजा कार में ट्रक के आगे-आगे चल रहा था ताकि पुलिस की नाकाबंदी या चेकिंग की भनक ट्रक ड्राइवर को पहले ही लग सके। अभियोजन का यह भी कहना था कि आरोपियों ने अपने फोन नष्ट कर दिए हैं और फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे, इसलिए मुख्य सरगनाओं तक पहुंचने के लिए आकाश को जमानत न दी जाए।
दूसरी ओर, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का बारीकी से अध्ययन करने के बाद पाया कि मौके पर आरोपी से कोई सीधी जब्ती नहीं हुई है और न ही वह ट्रक के आसपास मौजूद पाया गया था। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि आकाश का नाम मुख्य रूप से सह-आरोपी दीपक चौधरी के पुलिस के समक्ष दिए गए इकबालिया बयान के आधार पर आया था, जिसकी कानूनी स्वीकार्यता बहस का विषय है। इसके अलावा, पुलिस अभी तक आरोपी और मुख्य साजिशकर्ताओं के बीच कोई ठोस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) या वित्तीय लेनदेन (मनी ट्रेल) अदालत के सामने पेश करने में नाकाम रही है। इन तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए और आरोपी का कोई पुराना आपराधिक इतिहास न होने तथा उसके एक लॉ छात्र होने को आधार बनाते हुए अदालत ने उसकी जमानत मंजूर कर ली।
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