Ayodhya Deepotsav 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के दीपोत्सव को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का जीवंत उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि जाति की जड़ता समाज को बांटने का काम करती है, जबकि साझा आस्था और संस्कृति लोगों को एक सूत्र में पिरोती है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में कहा कि श्री अयोध्या जी का दीपोत्सव इसी सामाजिक एकता की भावना को सामने लाता है। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, दीपोत्सव केवल दीप जलाने या धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के अलग-अलग वर्गों को एक मंच पर लाने का अवसर भी है।
इसमें अलग-अलग पृष्ठभूमि और पेशों से जुड़े लोग अपनी श्रद्धा और उत्साह के साथ शामिल होते हैं। मुख्यमंत्री ने इस सामूहिक भागीदारी को समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जब लोग किसी साझा परंपरा और आस्था के साथ एक जगह जुटते हैं, तो सामाजिक भेदभाव की जगह आपसी जुड़ाव और सहभागिता की भावना मजबूत होती है। अयोध्या का दीपोत्सव इसी सोच को आगे बढ़ाता है। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने की बात कही कि समाज की पहचान जातिगत सीमाओं से नहीं, बल्कि साझा संस्कृति और सामूहिक योगदान से बनती है।
2017 में दीपोत्सव की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में वर्ष 2017 से पहले की सरकारों पर जातीय विभाजन को राजनीति का आधार बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उस समय समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक शक्ति की उपेक्षा की गई। उनके मुताबिक, साझा परंपराओं और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए लोगों को जोड़ने की दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं हुए। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 में डबल इंजन सरकार ने अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत की। इस पहल के माध्यम से राम नगरी की सांस्कृतिक विरासत को एक बड़े सार्वजनिक आयोजन के रूप में सामने लाया गया। उनका कहना है कि इस आयोजन ने अयोध्या की परंपराओं को जन-जन से जोड़ने का काम किया है।
मुख्यमंत्री ने दीपोत्सव को अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए कहा कि राम नगरी की परंपराएं केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि वे समाज को जोड़ने का माध्यम भी बन सकती हैं। दीपोत्सव के जरिए लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने और उसमें सक्रिय भागीदारी करने का अवसर मिलता है। उनके संदेश के मुताबिक, वर्ष 2017 से शुरू हुई यह परंपरा अब व्यापक जनभागीदारी वाले आयोजन का रूप ले चुकी है। इसमें समाज के अलग-अलग वर्गों की मौजूदगी अयोध्या की साझा सांस्कृतिक विरासत को सामने लाती है। मुख्यमंत्री ने इसे ऐसी पहल बताया, जिसमें परंपरा और सामाजिक सहभागिता एक साथ दिखाई देती हैं।
संतों से लेकर विद्यार्थियों, कुम्हारों और व्यापारियों तक की भागीदारी
योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूज्य संतगण के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में धर्माचार्य, विद्यार्थी, स्वच्छताकर्मी, कुम्हार और व्यापारी समान उत्साह और श्रद्धा के साथ हिस्सा लेते हैं। इस भागीदारी के जरिए मुख्यमंत्री ने आयोजन को किसी एक वर्ग तक सीमित न मानते हुए समाज के व्यापक उत्सव के रूप में पेश किया। उनके अनुसार, दीपोत्सव में हर वर्ग का योगदान इसकी सामूहिक पहचान को मजबूत करता है। इसमें धार्मिक परंपराओं से जुड़े संतों के साथ-साथ विद्यार्थी, श्रमिक और कारोबार से जुड़े लोग भी शामिल होते हैं।
कुम्हारों की भागीदारी का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने उस परंपरा की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसमें मिट्टी के दीपक इस उत्सव का अहम हिस्सा होते हैं। वहीं, स्वच्छताकर्मियों, विद्यार्थियों और व्यापारियों की मौजूदगी को उन्होंने समाज के अलग-अलग हिस्सों की साझा सहभागिता के रूप में रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि दीपोत्सव में पहचान जाति से नहीं, बल्कि सहभागिता से होती है। यानी इस आयोजन में कौन किस जाति या समुदाय से आता है, इसके बजाय यह मायने रखता है कि वह साझा उत्सव में किस तरह योगदान दे रहा है। उन्होंने इसी भावना को सामाजिक समरसता का आधार बताया।
योगी आदित्यनाथ ने दीपक के प्रकाश का उदाहरण देकर अपने संदेश को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि दीप भले ही अलग-अलग हाथों में जलते हैं, लेकिन उनका प्रकाश पूरे समाज को एक करता है। उनके मुताबिक, दीपोत्सव का यही मूल संदेश है कि समाज में विविधता के बावजूद साझा आस्था और संस्कृति लोगों को जोड़ सकती है। मुख्यमंत्री ने इस विचार के जरिए सामाजिक एकता को सामूहिक भागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया। उनका कहना है कि अलग-अलग वर्गों के लोग जब एक सांस्कृतिक आयोजन में समान श्रद्धा और उत्साह से शामिल होते हैं, तो आपसी जुड़ाव की भावना मजबूत होती है।
दीपोत्सव इसी भावना को सार्वजनिक रूप से सामने लाता है। योगी ने इसे समरस समाज की संकल्पना से जोड़ते हुए कहा कि साझा संस्कृति समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम करती है। अयोध्या का दीपोत्सव उनके अनुसार ऐसा अवसर है, जहां परंपरा, आस्था और जनभागीदारी एक साथ दिखाई देती हैं। मुख्यमंत्री का संदेश इसी बात पर केंद्रित रहा कि सामाजिक पहचान को जातिगत विभाजन के बजाय साझा सहभागिता और सांस्कृतिक जुड़ाव के आधार पर देखा जाना चाहिए।
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