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Ram Mandir first CEO: अयोध्या राम मंदिर को मिला पहला CEO, पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट ने सौंपी जिम्मेदारी

VVinita Kohli
Ram Mandir first CEO: अयोध्या राम मंदिर को मिला पहला CEO, पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट ने सौंपी जिम्मेदारी

अयोध्या राम मंदिर को मिला पहला CEO

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Ram Mandir first CEO: अयोध्या के राम मंदिर को बुधवार को पहला चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) मिल गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला CEO बनाने का फैसला लिया गया। देवरिया के रहने वाले जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया था। ट्रस्ट ने इसी बैठक में तीन नए ट्रस्टियों के नामों का भी ऐलान किया है। ट्रस्ट ने दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका, अयोध्या के एडवोकेट मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव को ट्रस्टी बनाया है। मंदिर में 7 जून को चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे में कई बदलाव किए जा रहे हैं।

 

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कौन हैं राम मंदिर के नए CEO जितेंद्र मिश्रा

पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से देवरिया के रहने वाले हैं। भारतीय वायुसेना में लंबी सेवा के दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी वायु कमान को लीड किया था। अब उन्हें अयोध्या में राम मंदिर के प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। CEO के तौर पर उनकी भूमिका मंदिर से जुड़े प्रशासन, व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में अहम होगी।

 

तीन नए ट्रस्टी भी बनाए गए

ट्रस्ट की बैठक में तीन नए ट्रस्टियों के नाम घोषित किए गए। दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के एडवोकेट मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव को ट्रस्टी बनाया गया है।

एडवोकेट मदन मोहन पांडेय राम जन्मभूमि-बाबरी विवाद मामले में रामलला की ओर से कानूनी पैरवी करने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि से जुड़े पक्ष की दलीलों में भूमिका निभाई। जनवरी 2024 में एक इंटरव्यू में पांडेय ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके 51 साल के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि रहा।

महेश भागचंदका दिल्ली के कारोबारी हैं और अशोक सिंघल फाउंडेशन चलाते हैं। उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं, जिनमें ‘अशोक सिंघल : हिंदुत्व के पुरोधा’, ‘बोलती अनुभूतियां’ और ‘श्री राम मंदिर काव्य यात्रा’ प्रमुख हैं। भागचंदका, विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं। 2020 में राम मंदिर के भूमि पूजन के धार्मिक अनुष्ठानों में वह मुख्य यजमान रहे थे। इसके बाद 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान भी वह यजमान रहे।

 

चढ़ावा चोरी के बाद ट्रस्ट में बड़े बदलाव

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इस मामले में आठ आरोपी जेल में हैं। इसके बाद 2 जुलाई को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया था। ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे। इसके बाद रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया। ट्रस्ट ने चार सोने-चांदी की वस्तुएं दिखाते हुए उनकी चोरी का दावा भी किया था। ट्रस्ट के मुताबिक, उसे दान के जरिए 3,264 करोड़ रुपए मिले थे, जिसमें से 2,370 करोड़ रुपए मंदिर निर्माण और अन्य कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं।

 

गर्भगृह में दो AC लगाने के प्रस्ताव पर भी नजर

रामलला की सेवा के लिए दो AC मंगाए गए हैं। इनमें एक 1 टन और दूसरा 3 टन क्षमता का है। दोनों AC गर्भगृह में लगाए जाने हैं। इन्हें लगाने के लिए गर्भगृह की दीवारों में छेद करना पड़ेगा। धार्मिक समिति इस संबंध में अपना प्रस्ताव ट्रस्ट को सौंप चुकी है और बैठक में इस पर मंजूरी मिल सकती है।
ट्रस्ट मंदिर की व्यवस्थाओं को अलग-अलग स्तर पर संचालित करने के लिए परिक्रमा और प्रसाद समितियां बनाने की तैयारी में है। परिक्रमा समिति राम मंदिर के चारों ओर साधु-संतों और श्रद्धालुओं की परिक्रमा से जुड़ी व्यवस्था को बेहतर बनाने पर काम करेगी। प्रसाद समिति रामलला के भक्तों को रोज दिए जाने वाले प्रसाद की व्यवस्था देखेगी। त्योहारों और विशेष अवसरों पर दिए जाने वाले प्रसाद को लेकर भी यही समिति फैसला करेगी।

 

22 जुलाई को बनाई गई थी 9 संतों की धार्मिक समिति

ट्रस्ट ने 22 जुलाई को नौ संतों की धार्मिक समिति बनाई थी। इसमें अयोध्या के पांच संत और मंदिर ट्रस्ट से चार संत शामिल किए गए। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि को समिति का अध्यक्ष बनाया गया। उस समय ट्रस्ट ने एक प्रवक्ता और सचिव बनाए जाने की भी बात कही थी। अब नए CEO और ट्रस्टियों की नियुक्ति के साथ मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को नया ढांचा मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।

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