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Bajrang Punia: जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज से भड़के बजरंग पूनिया, बोले- ‘हाथों में तिरंगा था, फिर भी बरसाए डंडे’

Bajrang Punia: जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज से भड़के बजरंग पूनिया, बोले- 'हाथों में तिरंगा था, फिर भी बरसाए डंडे'

‘80% लोग मानसिक गुलाम बने’, जंतर-मंतर घटना पर बजरंग पूनिया का सरकार पर तीखा हमला

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AAmandeep Singh

Bajrang Punia: देश की राजधानी के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर डटे छात्रों के आंदोलन ने अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। कुश्ती प्रतियोगिता के सिलसिले में विदेश गए ओलंपियन और कांग्रेस नेता बजरंग पूनिया ने भारत लौटते ही छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। एक भावुक और आक्रामक वीडियो जारी करते हुए पूनिया ने साफ कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसे देखकर कोई भी संवेदनशील इंसान खामोश नहीं रह सकता।

उन्होंने कहा कि लगभग 14-15 साल से अपने भविष्य और हक के लिए लड़ रहे युवा भाइयों-बहनों पर जिस तरह से खाकी का जोर आजमाया गया, वह लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है। पूनिया के अनुसार, छात्रों पर न सिर्फ लाठियां बरसाई गईं, बल्कि उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और प्लास्टिक बुलेट तक चलाई गईं।

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‘अंधभक्तों को छोड़िए, बच्चे वोट नहीं अपना हक मांगने आए थे’

बजरंग पूनिया ने उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें छात्रों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया जा रहा था। उन्होंने कहा, “बच्चे पुलिस पर हमला करने नहीं आए थे, उनके हाथों में किताबें, कॉपियां और देश का तिरंगा था। प्रॉपर चेकिंग के बाद ही उन्हें वहां जाने दिया गया था।” पूनिया ने सवाल उठाया कि जब बच्चे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे, तो वहां सिविल ड्रेस में डंडे लेकर खड़े लोग कौन थे और पत्थरों से भरे ट्रक वहां किसने खड़े करवाए थे?

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज देश के करीब 80 प्रतिशत लोग ‘मानसिक गुलामी’ का शिकार हो चुके हैं। जो भी अपने हक के लिए आवाज उठाता है—चाहे वह किसान हो, जवान हो, पहलवान हो या छात्र—उसे दबा दिया जाता है।

‘महिला पहलवानों जैसा हाल छात्रों का किया’, व्यवस्था पर उठाए तीखे सवाल

अपने पुराने आंदोलन की याद दिलाते हुए पूनिया ने कहा कि जिस तरह दो-तीन साल पहले महिला पहलवानों के साथ बदसलूकी की गई और उन पर डंडे बरसाए गए, ठीक वही रवैया आज छात्रों के साथ अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गंभीर आरोपों के बावजूद सरकार हमेशा आरोपियों के साथ खड़ी दिखाई देती है, जबकि अपने हक के लिए लड़ने वालों को कभी ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ तो कभी ‘खालिस्तानी’ का तमगा दे दिया जाता है।

भारतीय जनता पार्टी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म और भगवान राम के नाम पर राजनीति करके लोगों को आपस में बांटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पैसे और सत्ता के दम पर आवाज दबाने का खेल जारी है।

किसानों, खिलाड़ियों और आम जनता से एकजुट होने की अपील

पूनिया ने बताया कि वह कुश्ती के सिलसिले में देश से बाहर थे, इसलिए तुरंत मौके पर नहीं पहुंच सके, लेकिन अब वे सीधे जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों के बीच अपनी हाजिरी दर्ज कराएंगे। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी भी किसी न किसी परीक्षा को पास करके ही भर्ती हुए हैं और उनके घरों में भी बच्चे हैं, इसलिए उन्हें भी सोचना चाहिए कि वे किन पर लाठियां चला रहे हैं।

अंत में उन्होंने देश भर के किसान संगठनों, खिलाड़ियों, युवाओं और उनके परिवारों से अपील की कि अगर देश के लोकतंत्र और युवाओं के भविष्य को बचाना है, तो सभी को मतभेद भुलाकर एक मंच पर आना होगा।

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