Haryana Weather: हरियाणा में बीते दो दिनों तक चली मौसमी हलचल और छिटपुट बारिश के दौर के बाद अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने लगा है। बादल छटने के साथ ही प्रदेश के ज्यादातर जिलों में आसमान साफ हो गया है, जिससे सुबह और ढलती रात के वक्त ठंडक तेजी से अपने पैर पसार रही है। तापमान में आई इस अचानक गिरावट से लोगों को अब अलसुबह और शाम के समय हल्की सिहरन महसूस होने लगी है।
मौसम विभाग से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में नारनौल सबसे ठंडा इलाका दर्ज किया गया, जहां न्यूनतम तापमान गिरकर 13.0 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है। वहीं, हिसार, सिरसा और बालसमंद में अधिकतम तापमान 29.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। करनाल में भी दिन के पारे में भारी गिरावट देखी गई और यह घटकर 21.6 डिग्री सेल्सियस तक आ पहुंचा। दिन और रात के तापमान में आ रहे इस बड़े अंतर से ठंड का असर और ज्यादा नुमाया होने लगा है।
नमी वाली हवाओं का दिखेगा असर, आने वाले दिनों में और गिरेगा तापमान
मौसम वैज्ञानिक डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि बीते दिनों बंगाल की खाड़ी से उठी नमी भरी हवाओं ने हरियाणा के मौसम पर सीधा असर डाला है। इन हवाओं की मौजूदगी के चलते ही प्रदेश में मौसम परिवर्तनशील बना हुआ है। वायुमंडल में नमी का स्तर बढ़ने की वजह से सुबह और शाम के समय गुलाबी ठंड का अहसास गहरा गया है।
वैज्ञानिकों का आकलन है कि भले ही आने वाले चौबीस घंटों में रात के तापमान में मामूली फेरबदल देखने को मिले, लेकिन उसके बाद मौसम पूरी तरह शुष्क हो जाएगा। शुष्क मौसम की शुरुआत के साथ ही आने वाले दिनों में रात और दिन, दोनों ही पारे में लगातार गिरावट देखने को मिलेगी।
रबी की फसलों के लिए मुफीद हुआ मौसम, वैज्ञानिकों ने दी सरसों और चने की बुवाई की सलाह
मौसम में आए इस बदलाव को कृषि विशेषज्ञ रबी फसलों की बिजाई के लिए बेहद उपयुक्त मान रहे हैं। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग के वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों में पर्याप्त नमी को देखते हुए सरसों और चने की बुवाई का काम तुरंत शुरू कर दें। सरसों की खेती के लिए RH 30 और RH 0749 जैसी उन्नत किस्मों का चुनाव करने और बिजाई से पहले प्रति किलो बीज को 2 ग्राम कार्बेंडाजिम से उपचारित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही चने की C 235 और HC 5 किस्मों की बिजाई शुरू करने तथा पशुओं के चारे के लिए जई और बरसीम लगाने का भी यह सही समय है। कृषि विशेषज्ञों ने धान उत्पादक किसानों को हिदायत दी है कि कटाई से करीब दो हफ्ते पहले खेतों में पानी देना पूरी तरह बंद कर दें ताकि नमी नियंत्रित रहे। साथ ही कपास की चुगाई सुबह ओस सूखने के बाद ही करने और पर्यावरण सुरक्षा के मद्देनजर खेतों में पराली न जलाने की पुरजोर अपील की गई है।

