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Barnala News: बरनाला हाईवे पर शराब ठेके को लेकर विवाद, किसान नेताओं ने नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप

Barnala News: बरनाला हाईवे पर शराब ठेके को लेकर विवाद, किसान नेताओं ने नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप

बरनाला हाईवे पर शराब ठेके को लेकर विवाद

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Barnala News: एक तरफ जहां देश की सबसे बड़ी अदालत द्वारा सड़क हादसों को रोकने और कीमती जानें बचाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर शराब की बिक्री को लेकर सख्त कानून बनाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर बरनाला में इन नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बरनाला-मोगा नेशनल हाईवे पर स्थित जिला जेल बरनाला के बिल्कुल पास, ओवरब्रिज के सामने नियमों के विपरीत जाकर हाईवे के ऊपर शराब का ठेका चलाया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। लेकिन कथित सरकारी शह के चलते किसी भी उच्च अधिकारी की हिम्मत इस अवैध ठेके को बंद करवाने की नहीं हो रही है।

गौरतलब है कि सड़क हादसों में होने वाली मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए और कीमती जानें बचाने के मकसद से दायर एक जनहित याचिका पर साल 2015 में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार किसी भी नेशनल हाईवे के 500 मीटर के दायरे के भीतर कोई भी शराब का ठेका नहीं खोला जा सकता और न ही वह हाईवे से सीधा दिखाई देना चाहिए। लेकिन बरनाला हाईवे पर चल रहा यह ठेका साफ करता है कि राज्य सरकार और आबकारी विभाग इन आदेशों को लागू करने के प्रति कितने गंभीर हैं। हालांकि जब भी यह मामला अखबारों की सुर्खियां बनता है, तो निचले स्तर से लेकर ऊपरी स्तर तक के अधिकारियों द्वारा कार्रवाई का भरोसा देकर महज खानापूर्ति करने में अपनी अहम भूमिका निभाई जाती है।

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जिसकी यदि पंजाब से बाहरी जांच एजेंसी से जांच करा ली जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। इस अवैध प्रक्रिया के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन के जिला नेता गुरविंदर सिंह नामधारी और ब्लॉक नेता भिंदा सिंह ढिल्लों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए इन हाईवे वाले ठेकों को निर्धारित दूरी से बाहर नहीं भेजा, तो वे तीखा संघर्ष शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। इस संबंध में जब प्रबंधकों से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मालिक के बाहर होने के कारण उनके नंबर पर कॉल फॉरवर्ड की हुई है, कल बात कर लेना। इस मामले के संबंध में आबकारी इंस्पेक्टर दविंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने आज ही बरनाला में पद संभाला है और यदि ठेका नियमों के विपरीत हुआ तो ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बदलाव के दावों पर उठे सवाल, विरोधियों के निशाने पर सरकार
चुनाव से पहले स्वास्थ्य, शिक्षा और नशा-मुक्ति का नारा देने वाली सरकार के कार्यकाल में अदालती आदेश कागजी बनकर रह गए हैं। राज्य में बड़े बदलाव का ढिंढोरा पीटकर सत्ता में आई आम आदमी पार्टी की सरकार अब इस मुद्दे पर लोगों के कटघरे में है। स्थानीय लोगों और राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव से पहले ‘आप’ द्वारा घर-घर स्वास्थ्य व शिक्षा पहुंचाने और नशों को जड़ से खत्म करने की बड़ी-बड़ी गारंटियां दी गई थीं। लेकिन अब हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। शहीद भगत सिंह की सोच पर पहरा देने का दावा करने वाली सरकार के राज में नियमों को ताक पर रखकर हाईवे पर ठेके चलाने वाले माफिया को कथित तौर पर शह दी जा रही है।

जिले में कई अन्य ठेके भी हाईवे पर
यह मामला सिर्फ जिला जेल के पास वाले ठेके तक ही सीमित नहीं है। यदि बरनाला जिले के भीतर बारीकी से देखा जाए तो कई अन्य शराब के ठेके भी ऐसे हैं, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए 500 मीटर के दायरे के अंदर ही आते हैं और हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को सीधे नजर आते हैं। हाईवे पर बने ये ठेके तेज रफ्तार वाहन चालकों को आसानी से शराब उपलब्ध करवाते हैं, जो कि सीधे तौर पर बड़े सड़क हादसों को न्योता देने के बराबर है। अब देखना यह होगा कि क्या आबकारी विभाग और जिला प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर रसूखदारों के दबाव में यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा।

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