Captain Amarinder Singh Statement : 4 साल बाद छलका कैप्टन का दर्द, बोले- भाजपा में रहकर कुछ हासिल नहीं हुआ
4 साल बाद छलका कैप्टन का दर्द, बोले- भाजपा में रहकर कुछ हासिल नहीं हुआ
Captain Amarinder Singh Statement : पंजाब की सियासत के सबसे कद्दावर और बेबाक चेहरों में शुमार पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी में अपने चार साल के कार्यकाल पर बड़ा और अप्रत्याशित बयान देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सितंबर 2022 में अपनी पार्टी ‘पंजाब लोक कांग्रेस’ का भाजपा में विलय करने वाले कैप्टन ने स्वीकार किया कि इस नई सियासी पारी में उन्हें वह सम्मान या भूमिका नहीं मिली जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
एक प्रमुख समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में कैप्टन ने कहा, “भाजपा में चार साल बिताने के बाद अगर मैं पीछे मुड़कर देखूं, तो मैंने वास्तव में कुछ भी हासिल नहीं किया।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब भाजपा राज्य में बिना किसी क्षेत्रीय सहयोगी के अकेले पैर जमाने की कोशिश कर रही है।
‘छह दशक का अनुभव लेकिन सलाह की कोई कद्र नहीं’: तल्खी और मजबूरी दोनों उजागर
करीब छह दशकों तक पंजाब के सामाजिक व राजनीतिक ताने-बाने को करीब से देखने वाले 84 वर्षीय कैप्टन ने अपनी कसक बयां करते हुए कहा कि जब कोई वरिष्ठ राजनेता किसी नई पार्टी का रुख करता है, तो यह स्वाभाविक अपेक्षा होती है कि राज्य से जुड़े मामलों में उससे सलाह-मशविरा किया जाएगा।
कैप्टन ने कहा, “मैं यह दावा नहीं करता कि पंजाब से जुड़ी हर समस्या का समाधान मेरे पास है, लेकिन मैं इस राज्य की नस-नस से वाकिफ हूं।” उन्होंने माना कि इस स्थिति को लेकर वे खुद भी कुछ हद तक उलझन और असमंजस में हैं। जब उनसे भविष्य के विकल्पों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से कहा कि उनके पास फिलहाल कोई दूसरा सियासी रास्ता भी नहीं बचा है—अकाली दल में वे जा नहीं सकते और कांग्रेस में वापसी का सवाल ही पैदा नहीं होता।
2027 के लिए भाजपा को बड़ी सलाह: ‘अकाली दल के बिना पंजाब में सरकार बनाना मुमकिन नहीं’
सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बनाने का ऐलान करते हुए कैप्टन ने स्पष्ट कर दिया कि वे अब एक उम्मीदवार के रूप में मैदान में नहीं उतरेंगे। हालांकि, 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर उनका राजनीतिक आकलन काफी तीखा और रणनीतिक है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबले को स्वीकार करते हुए कैप्टन ने जमीनी स्तर पर भाजपा के अकेले वजूद पर सवाल खड़े किए। उन्होंने भाजपा नेतृत्व को स्पष्ट सुझाव दिया कि अगर पार्टी पंजाब में सत्ता में आना चाहती है, तो उसे अपने पुराने और सबसे भरोसेमंद सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ दोबारा गठबंधन करना ही होगा। कैप्टन के मुताबिक, दोनों दलों का पुराना इतिहास रहा है और गठबंधन के बिना पंजाब के जटिल राजनीतिक समीकरण को साधना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।
