Chandigarh CBI Raid: चंडीगढ़ प्रशासन में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और वेतन भुगतान के नाम पर कथित करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने छापेमारी की है। वीरवार सुबह जांच एजेंसी की टीमों ने प्रशासन के विभिन्न विभागों और शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली चार सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियों के कार्यालयों पर एक साथ कार्रवाई की। सेक्टर-34, डड्डूमाजरा और मनीमाजरा स्थित कार्यालयों में पहुंची टीमों ने टेंडर आवंटन, कर्मचारियों की भर्ती और वेतन भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। एजेंसियों के संचालकों के घरों पर भी दबिश दी गई।
यह मामला इसलिए अहम है, क्योंकि इन एजेंसियों के माध्यम से चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों, कॉलेजों और अन्य सरकारी संस्थानों में बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी काम करते हैं। शिकायत में टेंडर देने की प्रक्रिया, कर्मचारियों की नियुक्ति और सरकारी धन के भुगतान में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। अब जांच का दायरा प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचने की बात भी सामने आई है, हालांकि किसी अधिकारी के खिलाफ आरोप प्रमाणित होने की पुष्टि नहीं हुई है।
चार सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियों के दफ्तरों पर छापेमारी
CBI ने जिन चार एजेंसियों के ठिकानों पर कार्रवाई की, उनमें जाहरवीर मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज, ए टू जेड मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज, नेशनल ग्रुप ऑफ सर्विसेज और किम्सी एंटरप्राइजेज शामिल हैं। ये एजेंसियां चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों और संस्थानों को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों सहित अन्य आउटसोर्स मैनपावर उपलब्ध कराती हैं। जांच टीमों ने एजेंसियों के कार्यालयों में पहुंचकर सरकारी टेंडरों, भर्ती संबंधी दस्तावेजों और वेतन भुगतान के रिकॉर्ड की पड़ताल की। संचालकों के आवासों पर भी कार्रवाई की गई। जांच में इन दस्तावेजों से यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि एजेंसियों को काम देने के लिए किन प्रक्रियाओं का पालन किया गया और कर्मचारियों की नियुक्ति तथा भुगतान किस आधार पर किया गया।
फिलहाल जांच एजेंसी की ओर से किसी घोटाले की पुष्टि या कार्रवाई के आधार पर किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। छापेमारी को जांच की प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए। आरोपों की वास्तविक स्थिति दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
करीब 30 हजार कर्मचारियों से जुड़े समूह जांच के दायरे में
जानकारी के मुताबिक, इन चारों समूहों से जुड़े करीब 30 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की आपूर्ति से संबंधित टेंडर, नियुक्ति और वेतन भुगतान का रिकॉर्ड जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी विभागों और संस्थानों को मैनपावर उपलब्ध कराने के लिए टेंडर किस प्रक्रिया के तहत दिए गए।
जांच के दौरान यह भी देखा जा सकता है कि टेंडर की शर्तों का पालन हुआ या नहीं, अन्य कंपनियों को प्रतिस्पर्धा का अवसर मिला या नहीं और कर्मचारियों की भर्ती निर्धारित नियमों के अनुसार की गई या नहीं। वेतन भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड के जरिए यह जांचना भी जरूरी होगा कि भुगतान और कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े दस्तावेजों में कोई विसंगति तो नहीं है। इस मामले में सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान पहुंचने की आशंका भी शिकायत में जताई गई है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक राशि, किसी भुगतान में गड़बड़ी या किसी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन पहलुओं पर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तीन भाई-बहनों से जुड़ी फर्मों को लेकर यूनियन ने की शिकायत
इस मामले में चंडीगढ़ प्रशासन के शिक्षा विभाग की ग्रुप-डी कर्मचारी यूनियन ने CBI की एंटी करप्शन ब्रांच में शिकायत दी थी। शिकायत में संदीप मलिक, उनके भाई विकास मलिक और बहन रेखा से जुड़ी फर्मों का उल्लेख किया गया है। यूनियन ने आरोप लगाया है कि चंडीगढ़ प्रशासन में मैनपावर उपलब्ध कराने से जुड़े करीब 70 प्रतिशत टेंडर इन फर्मों को दिए जा रहे हैं।
शिकायतकर्ता यूनियन ने सरकारी विभागों और शिक्षण संस्थानों में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, टेंडर आवंटन और वेतन भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने पर गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल की प्रक्रिया का हवाला देकर शिकायतों को दबा दिया जाता है। ये सभी आरोप शिकायतकर्ता यूनियन की ओर से लगाए गए हैं। फिलहाल इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। CBI की जांच में यह पता लगाना होगा कि संबंधित कंपनियों को टेंडर किस आधार पर दिए गए, क्या प्रक्रिया में अन्य पात्र कंपनियों को बराबरी का अवसर मिला और अधिकारियों की कोई भूमिका रही या नहीं।
कॉलेजों से लेकर जेल और खेल विभाग के टेंडर भी जांच की मांग में शामिल
यूनियन ने अपनी शिकायत में कई सरकारी संस्थानों में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए जारी टेंडरों का उल्लेख किया है। इनमें सेक्टर-11 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज फॉर मेन, सेक्टर-46 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज, बुड़ैल जेल, चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और खेल विभाग शामिल हैं।
शिकायतकर्ता यूनियन ने इन संस्थानों में जारी टेंडरों और भर्ती प्रक्रिया की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। इन संस्थानों में आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती से संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि नियुक्तियां किस प्रक्रिया के तहत हुईं और संबंधित एजेंसियों को काम देने में निर्धारित नियमों का पालन किया गया या नहीं। यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आउटसोर्सिंग के माध्यम से सरकारी संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति और वेतन भुगतान सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा होता है। यदि किसी प्रक्रिया में अनियमितता पाई जाती है, तो उसका असर सरकारी खर्च, भर्ती की पारदर्शिता और कर्मचारियों के हितों पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल किसी खास संस्थान में गड़बड़ी साबित होने की पुष्टि नहीं हुई है।
PCS अधिकारी, गजेटेड अधिकारी और कॉलेज प्रिंसिपल की भूमिका की भी जांच
मामले में चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों की भूमिका की जांच किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि एक PCS अधिकारी, एक गजेटेड अधिकारी और एक कॉलेज प्रिंसिपल की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन अधिकारियों के खिलाफ किसी आरोप के प्रमाणित होने की पुष्टि नहीं की गई है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित टेंडरों को मंजूरी देने, एजेंसियों के चयन और कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े फैसलों में किन अधिकारियों की क्या जिम्मेदारी थी। इसके साथ ही टेंडर से जुड़े दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य संबंधित कागजात का मिलान करके किसी संभावित अनियमितता की जांच की जाएगी। संदीप मलिक और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कथित नजदीकी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, लेकिन इस संबंध में कोई ठोस प्रमाण सामने आने की जानकारी नहीं है। इसलिए इस दावे को फिलहाल आरोप और सवालों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि किसी स्थापित तथ्य के रूप में।
यूनियन अध्यक्ष ने की निष्पक्ष जांच और FIR की मांग
शिक्षा विभाग की ग्रुप-डी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष रणजीत मिश्रा ने CBI से पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में भर्ती प्रक्रिया और कर्मचारियों के दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कर्मचारियों के दस्तावेजों के कथित तौर पर जाली होने और नौकरी दिलाने के बदले लाखों रुपये लिए जाने जैसे आरोपों की भी चर्चा है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसी को दस्तावेजों, भुगतान के रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों से प्राप्त जानकारी के आधार पर ही किसी नतीजे पर पहुंचना होगा। फिलहाल CBI की कार्रवाई का प्रमुख केंद्र चार सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियों के रिकॉर्ड और उनसे जुड़े टेंडर हैं। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि टेंडर आवंटन या भर्ती प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं, सरकारी धन को नुकसान पहुंचा या नहीं और किसी अधिकारी अथवा एजेंसी की मिलीभगत थी या नहीं।
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