Chandigarh law and order: चंडीगढ़ में कानून-व्यवस्था और पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने यूटी चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) को मामले में व्यक्तिगत रूप से संज्ञान लेने और एक सप्ताह के भीतर अपने हस्ताक्षर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला याचिकाकर्ता शुभम की आपराधिक याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अपने बेटे की सुरक्षा सुनिश्चित करने, परिवार को न्याय दिलाने और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों का समाधान करने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने चंडीगढ़ के सेक्टर-34 पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR की निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी जांच कराने की मांग भी की है। उनका आरोप है कि बेटे पर हुए हमलों के मामले में पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली और कथित निष्क्रियता से उन्हें हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के DGP को खुद मामले पर ध्यान देने और एक सप्ताह के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने रिपोर्ट पर DGP के हस्ताक्षर अनिवार्य किए हैं, ताकि मामले की स्थिति सीधे पुलिस के शीर्ष अधिकारी के स्तर पर सामने आ सके। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि क्या DGP चंडीगढ़ की ओर से व्यक्तिगत रूप से मामले की जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने से समाधान निकल सकता है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकीलों ने इस व्यवस्था पर सहमति जताई। यह निर्देश ऐसे समय आया है, जब याचिकाकर्ता ने अपने बेटे की सुरक्षा और FIR की जांच को लेकर चिंता जताई है। अब पुलिस को निर्धारित समयसीमा में अदालत के सामने मामले की मौजूदा स्थिति रखनी होगी। गाड़ी पर ‘वीआईपी’ नंबर का ऐसा जुनून, 0001 के लिए लगा दी 21.31 लाख रुपये की बोली !
सेक्टर-34 थाने की FIR और पुलिस जांच पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता शुभम ने अपने बेटे की सुरक्षा की मांग के साथ सेक्टर-34 पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR की जांच पर सवाल उठाए हैं। FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 126(2), 115(2), 118(1), 351(3) और 3(5) लगाई गई हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके बेटे पर हुए हमलों के मामले में पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली और कार्रवाई को लेकर वह संतुष्ट नहीं हैं। इसी वजह से उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निष्पक्ष जांच और परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। इस मामले में अदालत के सामने पुलिस की जांच प्रक्रिया और याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए सवाल प्रमुख मुद्दे हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से संबंधित सभी तथ्यों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली आगे की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा।
याचिका में मामले के एक आरोपी की अग्रिम जमानत से जुड़ी कार्यवाही का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक खारिज हो चुकी है। याचिकाकर्ता ने इसके बावजूद पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली और कथित निष्क्रियता पर असंतोष जताया है। उनका कहना है कि बेटे की सुरक्षा और मामले की प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। अदालत ने फिलहाल DGP से व्यक्तिगत स्तर पर मामले को देखने और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इस रिपोर्ट से जांच की मौजूदा स्थिति और पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई का विवरण सामने आने की उम्मीद है।
इस मामले में यूटी चंडीगढ़ की ओर से पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मनीष बंसल ने नोटिस स्वीकार किया है। अदालत ने अन्य प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी किए हैं और अगली सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है। अब DGP को एक सप्ताह के भीतर अपने हस्ताक्षर वाली स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी। अगली सुनवाई में अदालत के सामने पुलिस की रिपोर्ट और मामले से जुड़े अन्य पक्षों की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी। Click Here : पंजाब, मोहाली, चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों की ताज़ा खबरों और अपडेट्स से जुड़े रहने के लिए आप हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन कर सकते हैं। ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें

