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Delhi Mayur Vihar History: क्यों पड़ा दिल्ली के मयूर विहार का नाम? जानिए इसके पीछे का दिलचस्प सीक्रेट

Delhi Mayur Vihar History: क्यों पड़ा दिल्ली के मयूर विहार का नाम? जानिए इसके पीछे का दिलचस्प सीक्रेट

क्यों पड़ा दिल्ली के मयूर विहार का नाम? जानिए इसके पीछे का दिलचस्प सीक्रेट

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AAmandeep Singh

Delhi Mayur Vihar History: राजधानी दिल्ली का हर कोना अपने भीतर इतिहास और दिलचस्प किस्सों की एक अनकही कहानी समेटे हुए है। कभी किसी इलाके का नाम किसी ऐतिहासिक इमारत पर पड़ गया तो किसी का स्थानीय परंपराओं पर।

इसी कड़ी में पूर्वी दिल्ली का सबसे चर्चित और व्यवस्थित इलाका ‘मयूर विहार’ अपने नाम को लेकर हमेशा से लोगों के कौतूहल का विषय रहा है। शुरुआती नाम में ‘मयूर’ शब्द जुड़ते ही हर किसी के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या वाकई इस इलाके का मोरों से कोई खास नाता रहा है? तो जवाब है- हां, इस इलाके का इतिहास सीधे तौर पर मोरों के प्राकृतिक आवास से जुड़ा हुआ है।

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कभी घने जंगलों में कूकते थे मोर, ऐसे बसा मयूर विहार

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने 1970 और 80 के दशक में यमुना पार (ट्रांस-यमुना) इलाके में एक महत्वाकांक्षी आवासीय योजना की नींव रखी थी। उससे पहले तक नोएडा बॉर्डर से सटा यह पूरा इलाका झाड़ियों, खेतों और घने जंगलों से घिरा हुआ था। स्थानीय बुजुर्गों और सोशल मीडिया पर साझा की गई पुरानी स्मृतियों के अनुसार, उस दौर में यह इलाका मोरों की भारी तादाद के लिए जाना जाता था।

सुबह-शाम मोरों की मधुर आवाज से पूरा इलाका गूंज उठता था। जब DDA ने यहां सरकारी कर्मचारियों, पीएसयू स्टाफ और आम जनता के लिए HIG, MIG और LIG फ्लैट्स का निर्माण शुरू किया, तो इस क्षेत्र के प्राकृतिक माहौल को देखते हुए इसका नाम ‘मयूर विहार’ यानी ‘मोरों के घूमने या रहने की जगह’ रखा गया।

शहरीकरण की भेंट चढ़ी हरियाली, पर आज भी जिंदा है पहचान

बीते चार दशकों में हुए अंधाधुंध शहरीकरण और कंक्रीट के जंगलों के निर्माण के कारण धीरे-धीरे मोरों की संख्या घटती चली गई। हालांकि, कोविड महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन के समय मयूर विहार के पार्कों और सोसायटियों की छतों पर मोरों के दिखने के कई मामले सामने आए, जिसने इस क्षेत्र के ऐतिहासिक और पारिस्थितिक जुड़ाव की याद ताजा कर दी।

हालांकि इस बात का कोई लिखित सरकारी गजट उपलब्ध नहीं है जो नामकरण के इस दावे की पुष्टि करता हो, लेकिन DDA के शुरुआती प्लानर्स और नगर निगम (MCD) के रुख से इसकी तस्दीक होती है। हाल के वर्षों में एमसीडी ने मयूर विहार क्षेत्र में बच्चों के लिए ‘मोर थीम’ आधारित पार्क विकसित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं, जो इसके सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाते हैं।

कनेक्टिविटी और लोकेशन में अव्वल है यह इलाका

आज मयूर विहार दिल्ली के सबसे मांग वाले और प्रीमियम रिहायशी इलाकों में से एक है। तीन अलग-अलग चरणों (फेज-1, फेज-2 और फेज-3) में बंटा यह इलाका बेहतरीन सड़कों, शानदार पार्कों, प्रतिष्ठित स्कूलों और बाजारों से लैस है।

कनेक्टिविटी के लिहाज से मयूर विहार बेहद मुफीद जगह पर स्थित है। दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन और पिंक लाइन का नेटवर्क इसे दिल्ली-एनसीआर के हर कोने से सीधे जोड़ता है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी महज 12-15 किलोमीटर और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 23 किलोमीटर है। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों से मेट्रो या कैब के जरिए यहां बेहद आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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