Diwali Puja Rules: रोशनी और उल्लास के पर्व दीपावली पर हर घर में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से आराधना की जाती है, ताकि सालभर घर में धन-धान्य और सुख-शांति बनी रहे। धार्मिक मान्यता है कि थोड़ी सी भी असावधानी या गलत तरीके से किया गया पूजन मां लक्ष्मी को रुष्ट कर सकता है। कुरुक्षेत्र के जाने-माने तीर्थ पुरोहित पंडित पवन शर्मा ने इस पावन पर्व पर बरती जाने वाली जरूरी सावधानियों और नियमों के बारे में विस्तार से बताया है, जिन्हें अपनाकर हम अनजाने में होने वाली भूलों से बच सकते हैं।
कितने दीये जलाना और उन्हें कहां रखना है जरूरी?
पंडित पवन शर्मा के अनुसार, दीपावली के दिन दीयों की संख्या का बड़ा धार्मिक महत्व है। इस दिन एक मुख्य अखंड दीये के अलावा लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21, 51 या 101 मिट्टी के दीपक जलाते हैं। इसके अलावा कुछ खास जगहों पर दीये रखना बहुत शुभ फल देता है:
मुख्य द्वार: घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ दीये जलाने से नकारात्मक ताकतें बाहर रहती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पूजा स्थल: मंदिर और देवी-देवता की मूर्ति के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाना अनिवार्य माना गया है।
तुलसी का पौधा: तुलसी के पास एक दीपक जरूर रखें, जिससे मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
घर के कोने: रसोई, बालकनी और अंधेरे कोनों में दीये रखने से वास्तु दोष दूर होते हैं।
छोटी-सी गलतियां और उनके दुष्परिणाम
माता लक्ष्मी का आगमन हमेशा साफ-सुथरे और पवित्र घरों में होता है। यदि दीपावली की रात मुख्य द्वार पर गंदगी रखी जाए, कोनों में अंधेरा छोड़ा जाए या दरवाजा बंद रखा जाए, तो इसे देवी का अपमान माना जाता है।
इससे आर्थिक तंगी और नकारात्मकता बढ़ती है। इसके अलावा पूजा के दौरान कभी भी खंडित यानी टूटी हुई मूर्तियों का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे परिवार में कलह बढ़ती है। पूजा के वक्त काले या गहरे नीले रंग के कपड़े पहनना भी वर्जित माना गया है, क्योंकि ये रंग नकारात्मकता को बढ़ावा देते हैं। मुख्य दीपक का अचानक बुझ जाना भी कार्यों में रुकावट का संकेत माना जाता है।
अग्नि सुरक्षा और पारिवारिक सौहार्द की सीख
दीपावली के उल्लास में सुरक्षा का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। दीये और कपूर को सुरक्षित स्थानों पर रखें और बच्चों को इनसे दूर रखें। घर के अंदर या पूजा सामग्री के नजदीक बिल्कुल भी पटाखे न जलाएं, क्योंकि जरा सी लापरवाही खुशियों को मातम में बदल सकती है। इसके साथ ही, इस पवित्र दिन घर में किसी भी तरह का क्लेश, गुस्सा या वाद-विवाद नहीं होना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक, जिस घर में महिलाओं का अपमान होता है या बड़े-बुजुर्गों को कष्ट दिया जाता है, वहां कभी मां लक्ष्मी का वास नहीं टिकता। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर हम अपने जीवन में स्थायी समृद्धि का स्वागत कर सकते हैं।
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