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farmers News: फरीदाबाद में डीएपी खाद का हाहाकार, सुबह 5 बजे से लाइन में किसान, जबरन सरसों का तेल बेचने का आरोप

farmers News: फरीदाबाद में डीएपी खाद का हाहाकार, सुबह 5 बजे से लाइन में किसान, जबरन सरसों का तेल बेचने का आरोप

धान की रोपाई के बीच हरियाणा में डीएपी संकट; किसानों ने प्रशासन से लगाई कालाबाजारी रोकने की गुहार

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AAmandeep Singh

farmers News: हरियाणा में मानसून की दस्तक के साथ ही किसान पूरे दमखम से धान की बुवाई और रोपाई में जुट गए हैं। लेकिन इस बार फरीदाबाद के किसानों के सामने मौसम से ज्यादा सिस्टम की मार आड़े आ रही है।

जिले में इस समय सबसे बड़ा संकट डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) खाद की भारी कमी बन चुका है। हालत यह है कि किसान अपनी तैयार पौध को खेतों में रोपने की चिंता छोड़ सुबह 5 बजे से ही खाद केंद्रों के बाहर डेरा डाल लेते हैं, मगर घंटों की जद्दोजहद के बाद भी उनके हिस्से सिर्फ निराशा आ रही है। किसानों का आरोप है कि इस संकट की आड़ में डीलर और सहकारी समितियां उनका आर्थिक शोषण कर रही हैं।

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₹1355 का कट्टा ब्लैक में ₹1800 का हुआ, महादेव ऋषि बोले- ‘खेती करना अब सजा’

मूल रूप से बिहार के रहने वाले और पिछले तीन दशकों से फरीदाबाद की माटी में पसीना बहा रहे किसान महादेव ऋषि का दर्द प्रशासनिक दावों की पोल खोलता है। उन्होंने बताया, “हम सुबह 5 बजे लाइन में लगते हैं और शाम 5 बजे तक सिर्फ बहानों का सामना करना पड़ता है। कभी रजिस्ट्रेशन का अड़ंगा तो कभी सर्वर डाउन होने की बात कही जाती है।

” महादेव के मुताबिक, एक एकड़ में दो बैग डीएपी लगती है। सरकारी रेट ₹1355 है, लेकिन खुलेआम ब्लैक में इसके ₹1800 वसूले जा रहे हैं। हद तो तब हो जाती है जब डीएपी देने के एवज में जबरन एक लीटर सरसों का तेल और नैनो यूरिया खरीदने को मजबूर किया जाता है। उन्होंने इस बार 1509 वैरायटी की बुवाई की है, जिसमें प्रति एकड़ करीब 40 हजार रुपये की लागत आ रही है, मगर खाद की किल्लत ने कमर तोड़ दी है।

62 वर्षीय महिला किसान की आपबीती: “दस्तावेजों के जाल में उलझाकर थमा रहे गैर-जरूरी सामान”

खेती-किसानी में अपनी पूरी उम्र खपा चुकीं 62 वर्षीय महिला किसान राजेश बताती हैं कि यह परेशानी हर सीजन की कहानी बन चुकी है। इस बार उन्होंने अपने खेतों में 1692 वैरायटी की धान लगाई है, जिसे तुरंत खाद की दरकार है। राजेश के अनुसार, “जब भी हम केंद्र पर जाते हैं, तो पुराना रजिस्ट्रेशन या कोई न कोई नया कागज मांगकर घंटों बैठाए रखते हैं।

अंत में कह देते हैं कि स्टॉक खत्म हो गया।” उन्होंने आरोप लगाया कि सीधे तौर पर डीएपी देने के बजाय अधिकारी और वेंडर ₹1950 का दूसरा एमपी खाद और सरसों का तेल साथ में लेने का दबाव बनाते हैं। जरूरत जिस चीज की है, वह मिल नहीं रही और जो गैर-जरूरी है, उसे जबरन थैले में डाला जा रहा है।

यूपी से आए विकास भी बेहाल, क्या ठप हो जाएगा पौधों का विकास?

उत्तर प्रदेश से आकर फरीदाबाद में खेती कर रहे युवा किसान विकास कहते हैं कि बेहतर मुनाफे की उम्मीद में उन्होंने यहां जमीन ली थी, लेकिन 12-12 घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद भी बुनियादी खाद न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। धान की शुरुआती ग्रोथ के लिए डीएपी सबसे अनिवार्य तत्व है।

अगर जड़ों को समय पर यह पोषण नहीं मिला, तो पौधों का समुचित विकास रुक जाएगा, जिससे सीधा असर पैदावार और अनाज की गुणवत्ता पर पड़ेगा। धान की अलग-अलग किस्मों के आधार पर लागत बदलती है, लेकिन सामान्य तौर पर भी एक एकड़ में ₹25 हजार से अधिक की नकदी फंस जाती है।

गेहूं हो या धान; हर सीजन में कतारों का वही पुराना मंजर

स्थानीय किसान यूनियनों और ग्रामीणों का कहना है कि खाद का यह टोटा कोई अचानक आई विपदा नहीं है। रबी सीजन में गेहूं की बुवाई के वक्त भी यूरिया और डीएपी के लिए ठीक ऐसी ही मारामारी मची थी, और अब खरीफ में धान के सीजन में भी हालात जस के तस हैं।

किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से पुरजोर मांग की है कि खाद की कालाबाजारी पर तुरंत नकेल कसी जाए। साथ ही, डीएपी के साथ दूसरे उत्पादों की जबरन टैगिंग (लेवी) करने वाले भ्रष्ट डीलरों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि हजारों किसानों की गाढ़ी कमाई और महीनों की मेहनत को बर्बाद होने से बचाया जा सके।

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