Gold Silver Price: त्योहारी सीजन में सोने और चांदी की खरीदारी करने वालों के लिए कीमतों में आई गिरावट राहत लेकर आई है। इस साल की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद दोनों कीमती धातुओं के भाव अब काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में खरीदारों के सामने सवाल है कि दिवाली से पहले खरीदारी कर लेना फायदेमंद रहेगा या कुछ दिन और इंतजार करना चाहिए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 को 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 23 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग 1.41 लाख रुपये रह गई। यानी करीब दो महीने में सोने के भाव में लगभग 14 हजार रुपये की गिरावट आई। चांदी में गिरावट इससे भी ज्यादा रही है। 29 जनवरी 2026 को चांदी की कीमत 3.86 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। 23 अक्टूबर तक भाव घटकर करीब 1.94 लाख रुपये प्रति किलो रह गया। इस तरह चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से लगभग 1.92 लाख रुपये सस्ती हो चुकी है।
सोना-चांदी इस साल रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचे, फिर क्यों टूटे भाव?
साल 2026 की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल आया था। 31 दिसंबर 2025 को घरेलू बाजार में सोना करीब 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था। 29 जनवरी 2026 तक यह लगभग 1.76 लाख रुपये तक पहुंच गया। इसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच गिरावट शुरू हुई। चांदी की कीमत भी 31 दिसंबर 2025 के करीब 2.30 लाख रुपये प्रति किलो से बढ़कर 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। बाद में इसमें तेज गिरावट आई। 17 अक्टूबर से 24 अक्टूबर के बीच सोना करीब 1.46 लाख रुपये से घटकर 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब 2.11 लाख रुपये से गिरकर 1.94 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं पर दबाव दिखाई दिया। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2026 को सोना करीब 4,321 डॉलर प्रति औंस और चांदी 71.74 डॉलर प्रति औंस थी। अक्टूबर में सोना लगभग 4,000 डॉलर और चांदी करीब 54 डॉलर प्रति औंस के आसपास रही। एक औंस में लगभग 31.1 ग्राम होते हैं।
गिरावट की पहली वजह ब्याज दरों को लेकर चिंता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे हालात में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रख सकते हैं। जब बैंक जमा और सरकारी बॉन्ड जैसे विकल्पों पर बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद होती है, तो कुछ निवेशक सोने जैसी ऐसी संपत्तियों से पैसा निकाल सकते हैं जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। दूसरी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव डॉलर में तय होता है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा पड़ सकता है, जिससे मांग पर असर पड़ता है। भारत जैसे आयात पर निर्भर बाजार में डॉलर की चाल का असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ सकता है। तीसरी वजह रिकॉर्ड तेजी के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली है। जब किसी संपत्ति की कीमत तेजी से बढ़ती है, तो निवेशक मुनाफा सुरक्षित करने के लिए उसे बेचने लगते हैं। इससे कीमतों पर दबाव बन सकता है। हालांकि, सोने में लंबी अवधि की मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जैसे कारक आगे कीमतों को सहारा भी दे सकते हैं।
दिवाली तक और सस्ता होगा सोना-चांदी या आएगी तेजी?
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की चाल और भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख हैं। यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने के संकेत मिलते हैं, तो कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ सकता है। इसके उलट, तेल की कीमतों में कमी या अंतरराष्ट्रीय तनाव घटने से बाजार को राहत मिल सकती है। दिए गए अनुमानों में सोने की कीमतों में आगे तेजी की संभावना भी जताई गई है। गोल्डमैन सैक्स की 28 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, सोना 4,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। वहीं UBS की 20 अक्टूबर की रिपोर्ट में सितंबर 2027 तक कीमत 5,400 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान दिया गया है। ये अनुमान हैं, निश्चित भाव नहीं।
घरेलू बाजार में यदि सोने की कीमत मौजूदा करीब 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से 25% बढ़ती है, तो यह लगभग 1.78 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। 30% की तेजी पर भाव करीब 1.85 लाख और 35% की तेजी पर लगभग 1.92 लाख रुपये हो सकता है। वास्तविक कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये-डॉलर विनिमय दर, आयात लागत और स्थानीय शुल्कों के अनुसार अलग हो सकती है। चांदी को लेकर भी उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है। दिए गए अनुमानों के मुताबिक, चांदी में अगले कुछ महीनों में 15% से 30% तक तेजी संभव है। जेपी मॉर्गन के अनुमान में 2027 के दौरान चांदी करीब 64 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। घरेलू बाजार में यदि चांदी की कीमत 1.94 लाख रुपये प्रति किलो से 30% बढ़ती है, तो भाव लगभग 2.52 लाख रुपये प्रति किलो हो सकता है। हालांकि, तेजी की संभावनाओं के बावजूद कीमतों में और गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता। कमोडिटी और इक्विटी रिसर्च फर्म केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोना कुछ समय के लिए 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक नीचे आ सकता है। उनके अनुमान में चांदी 1.95 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है। उन्होंने अगले साल दिवाली तक चांदी के 3 लाख से 3.25 लाख रुपये प्रति किलो तक जाने की संभावना भी जताई है।
अभी खरीदारी करें या कुछ दिन और इंतजार करें?
सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के बीच खरीदारी का फैसला अपने उद्देश्य और बजट के हिसाब से करना बेहतर होगा। यदि दिवाली पर आभूषण खरीदने हैं, तो केवल कीमत और नीचे आने की उम्मीद में जरूरत को टालना जरूरी नहीं। हालांकि, एक ही दिन में पूरी खरीदारी करने के बजाय अलग-अलग चरणों में खरीदने से कीमतों के उतार-चढ़ाव का जोखिम कुछ हद तक बांटा जा सकता है। कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, यदि चांदी 1.78 लाख से 1.85 लाख रुपये प्रति किलो के दायरे में आती है, तो नए और पुराने निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी पर विचार कर सकते हैं। यह विशेषज्ञ की राय है, कीमत की गारंटी नहीं। अजय केडिया भी किश्तों में खरीदारी की सलाह देते हैं। उनके अनुसार, खरीदार कुछ मात्रा अभी ले सकते हैं और बाकी रकम से 15 से 20 दिन के अंतराल पर खरीदारी कर सकते हैं। निवेश के लिए एक-दो महीने के बजाय छह महीने से एक साल तक की अवधि को ध्यान में रखना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, कम अवधि में पैसों की जरूरत होने पर सोने-चांदी में बड़ी रकम लगाना जोखिम भरा हो सकता है।
स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी बोनान्जा पोर्टफोलियो के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट नृपेंद्र यादव के मुताबिक, गोल्ड-सिल्वर रेश्यो भी निवेश का फैसला लेने में मदद कर सकता है। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की जरूरत होगी। अनुपात में लगातार गिरावट चांदी के सोने के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन का संकेत दे सकती है, जबकि अनुपात बढ़ने पर सोना अपेक्षाकृत मजबूत रह सकता है। फिर भी, केवल इस अनुपात के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। आभूषण खरीदने वालों को सोने के शुद्धता स्तर, हॉलमार्क, मेकिंग चार्ज और अंतिम बिल पर भी ध्यान देना चाहिए। निवेश के लिए सिक्के, बार या अन्य विकल्प चुनते समय खरीद-बिक्री के अंतर और संबंधित शुल्क समझना जरूरी है। चांदी खरीदने पर भी शुद्धता, वजन और वापसी की शर्तें जांचनी चाहिए।
कुल मिलाकर, दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतें काफी नीचे आई हैं, लेकिन आगे की दिशा तय नहीं है। जल्दबाजी में पूरी रकम लगाने या केवल और गिरावट की उम्मीद में खरीदारी रोकने के बजाय अपनी जरूरत, बजट और निवेश अवधि के आधार पर फैसला लेना ज्यादा व्यावहारिक है। विशेषज्ञों के अनुमान बाजार की संभावनाएं बताते हैं, वे भविष्य की कीमतों की गारंटी नहीं हैं।
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