September 30, 2026

Vatika Group Fraud Case: वाटिका लिमिटेड के CMD अनिल भल्ला और गौतम भल्ला गिरफ्तार, ED को 3 अक्टूबर तक रिमांड

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Vatika Group Fraud Case: वाटिका लिमिटेड के CMD अनिल भल्ला और गौतम भल्ला गिरफ्तार, ED को 3 अक्टूबर तक रिमांड

वाटिका लिमिटेड के CMD अनिल भल्ला और गौतम भल्ला गिरफ्तार, ED को 3 अक्टूबर तक रिमांड

Vatika Group Fraud Case: हरियाणा के गुरुग्राम में होमबायर्स और निवेशकों के अरबों रुपये डकारने वाली रियल एस्टेट दिग्गज कंपनी मैसर्स वाटिका लिमिटेड (Gautam Bhalla Vatika Group Arrest) पर प्रवर्तन निदेशालय (Gurugram ED Raid Vatika) का शिकंजा पूरी तरह कस गया है। ईडी की गुरुग्राम जोनल यूनिट ने कार्रवाई करते हुए कंपनी के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) अनिल भल्ला और उनके बेटे व प्रमोटर गौतम भल्ला को गिरफ्तार कर लिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने दोनों को गुरुग्राम की विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 3 अक्टूबर 2026 तक ईडी रिमांड पर सौंप दिया गया है।

गिरफ्तारी से पहले ईडी की टीमों ने वाटिका ग्रुप से जुड़े 7 प्रमुख परिसरों पर पीएमएलए (Delhi Police EOW Vatika FIR) की धारा 17 के तहत ताबड़तोड़ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान प्रमोटर के ठिकाने से एक मर्सिडीज-बेंज जीएलसी 300 कार, लगभग 1.55 करोड़ रुपये मूल्य के 1.3 किलोग्राम से अधिक वजनी सोने-हीरे के आभूषण और 3.04 करोड़ रुपये मूल्य की बैंक एफडीआर (FDR) व जमा राशि जब्त और फ्रीज की गई है।

260 करोड़ रुपये ऐंठकर प्लॉटों का खेल: जानिए कैसे रचा गया फ्रॉड का चक्रव्यूह

ईडी द्वारा दर्ज किया गया यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (Gurugram Real Estate News) में दर्ज कई प्राथमिकियों (FIRs) पर आधारित है। वाटिका लिमिटेड, अनिल भल्ला, गौतम भल्ला, गौरव भल्ला और अन्य के खिलाफ धोखे से प्रलोभन देने, करोड़ों रुपये वसूलने के बावजूद आवासीय प्लॉटों का पजेशन न देने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप हैं।

जांच में खुलासा हुआ कि साल 2010 से 2012 के बीच सात खरीदार कंपनियों/संस्थाओं ने वाटिका लिमिटेड के सेक्टर 84/85 स्थित ‘वाटिका इंडिया नेक्स्ट’ और सेक्टर 88ए स्थित ‘वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2’ प्रोजेक्ट्स में प्लॉटों के लिए अग्रिम तौर पर करीब 260 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। 2014-15 में जब एग्रीमेंट बने, तब कंपनी ने चालाकी से प्रोजेक्ट्स का लेआउट बदल दिया। खरीदारों को अलॉट किए गए प्लॉटों के नंबर बदल दिए गए और जमीन को दूसरे लोगों को बेचना शुरू कर दिया गया।

14 साल बीतने पर भी प्लॉट का अतापता नहीं, 140 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट अन-डिलीवर्ड

जांच एजेंसी के अनुसार, ‘वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2’ प्रोजेक्ट में करीब 90 करोड़ रुपये में खरीदे गए 1.10 लाख वर्ग गज में से एक भी प्लॉट 14 साल बीत जाने के बाद भी डिलीवर नहीं हुआ है। वहीं ‘वाटिका इंडिया नेक्स्ट’ प्रोजेक्ट में केवल आंशिक डिलीवरी ही हो सकी। आंकड़ों के मुताबिक, आज भी लगभग 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के बड़े भूखंड खरीदारों को नहीं सौंपे गए हैं।

ईडी के अधिकारियों ने पाया कि अनिल भल्ला और गौतम भल्ला ही इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड रहे। दोनों ने मिलकर प्रोजेक्ट्स के सभी वित्तीय और रणनीतिक फैसले लिए। जमीन का मालिकाना हक करीब 22 कागजी (शेल) ग्रुप कंपनियों के पास रखा गया था, जिनमें न तो कोई कर्मचारी था और न ही कोई वास्तविक व्यापार। इनका इस्तेमाल सिर्फ वित्तीय संस्थानों से कर्ज और गारंटी लेने के लिए लैंड बैंक के तौर पर किया जाता था।

होमबायर्स का पैसा दूसरी कंपनियों में किया डायवर्ट, 154 करोड़ से ज्यादा का ‘क्राइम प्रोसीड्स’

बैंक खातों की जांच में यह साफ हुआ कि खरीदारों से लिया गया पैसा उन प्रोजेक्ट्स में लगाने के बजाय अन्य ग्रुप कंपनियों और प्रमोटरों की निजी संस्थाओं में ट्रांसफर कर दिया गया।

इतना ही नहीं, साल 2024 में एक अलग सौदे के दौरान ‘स्केलर वेंचर्स’ के साथ 473.18 करोड़ रुपये का बाय-बैक समझौता किया गया। इसमें 165 प्लॉटों में से सिर्फ 15 को वापस खरीदा गया, जबकि बिना स्केलर की जानकारी के 14 प्लॉटों को करीब 13.62 करोड़ रुपये में किसी तीसरे पक्ष को बेच डाला गया। ईडी का अनुमान है कि इस पूरे मामले में अपराध की कुल कमाई (Proceeds of Crime) इस वक्त लगभग 154.36 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जिसकी रिकवरी और तहकीकात के लिए दोनों आरोपियों से रिमांड के दौरान पूछताछ की जाएगी।

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