Sonipat News: हरियाणा में सरकारी महकमों में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। ताजा मामला सोनीपत से सामने आया है, जहां वक्फ बोर्ड के कार्यालय में तैनात एक एस्टेट ऑफिसर और रेंट क्लर्क को तीन लाख रुपये की रिश्वत ऐंठते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई के बाद से महकमे में हड़कंप मच गया है।
गोहाना की किशन कॉलोनी के रहने वाले सतीश ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को शिकायत दी थी कि उन्होंने अपने तीन साथियों—भरत सिंह, कमलेश और सुभाष के साथ मिलकर गोहाना में दुकानों के प्लाट के पट्टे (लीज) के लिए हरियाणा वक्फ बोर्ड में आधिकारिक आवेदन किया था। आरोप है कि जब उन्होंने प्रक्रिया के दौरान पहले पैसे जमा कराए, तो बोर्ड के अधिकारियों ने उन्हें भुगतान की कोई भी आधिकारिक रसीद जारी नहीं की, जिससे उनके मन में शक पैदा हुआ।
रसीद और हलफनामे के नाम पर मांगी गई थी रकम
शिकायतकर्ता के मुताबिक, करीब एक महीने पहले वक्फ बोर्ड कार्यालय में निजी तौर पर चपरासी का काम देखने वाले सलीम ने उन्हें संपर्क किया। उसने बताया कि उनके और उनके साथियों के प्लाट की फाइलें संशोधित होकर पास हो चुकी हैं। इसके बाद उन्हें तीन लाख रुपये लेकर सीधे सोनीपत स्थित वक्फ बोर्ड कार्यालय बुलाया गया। आरोपियों ने झांसा दिया था कि जैसे ही वे पैसे लेकर पहुंचेंगे, उन्हें पट्टों की आधिकारिक रसीदें थमा दी जाएंगी और पट्टा अनुबंध (लीज एग्रीमेंट) के लिए हलफनामा भी तैयार कर दिया जाएगा।
सतर्कता ब्यूरो ने बिछाया जाल, रंगे हाथों दबोचा
पीड़ित पक्ष ने इस अवैध उगाही और मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ चुप बैठने के बजाय सीधे राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का दरवाजा खटखटाया। शिकायत का सत्यापन कराने के बाद ब्यूरो ने बुधवार को एक पुख्ता रणनीति के तहत ट्रैप लगाया। योजना के मुताबिक शिकायतकर्ता को गोहाना बाईपास के नजदीक पैसे देने के लिए बुलाया गया था।
जैसे ही एस्टेट ऑफिसर मोहम्मद सलीम और रेंट क्लर्क मोहम्मद ताहिर ने रिश्वत के 3 लाख रुपये अपने हाथ में लिए, निरीक्षक मोहिंद्र सिंह के नेतृत्व में पहले से मुस्तैद सतर्कता ब्यूरो की टीम ने दोनों को दबोच लिया। तलाशी के दौरान अधिकारियों के पास से रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई। ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और अब उनसे गहन पूछताछ की जा रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क में शामिल अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।
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