Haryana guest teacher news: हरियाणा के सरकारी स्कूलों की नींव मजबूत करने वाले हजारों गेस्ट टीचर्स की पक्का होने की उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फिर गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा नियमितीकरण के संबंध में दो महीने में फैसला लेने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, प्रदेश सरकार ने एक स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर शिक्षकों को पक्का करने से साफ इनकार कर दिया है। सरकार के इस कदम से करीब 21 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे गेस्ट टीचर्स और उनके परिवारों में भारी निराशा और रोष व्याप्त हो गया है। प्रशासनिक रवैये से नाराज शिक्षकों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बनाते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है।
करनाल और अंबाला दौरे के दौरान लाइव कमेंट बॉक्स में गूंजी मांग
सरकार के इस नकारात्मक रुख के खिलाफ गेस्ट टीचर्स ने एक अनोखी रणनीति अख्तियार की है। बीते 5 नवंबर को जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ करनाल और अंबाला जिलों के दौरे पर थे, तब गेस्ट टीचर्स ने उनके कार्यक्रमों के लाइव प्रसारण को अपना हथियार बनाया। भाषणों के दौरान लाइव कमेंट बॉक्स में हजारों गेस्ट टीचर्स, उनके परिजनों और समर्थकों ने एक साथ ‘नियमितीकरण’ की मांग की झड़ी लगा दी। सोशल मीडिया पर चला यह अभियान दिनभर चर्चा का विषय बना रहा, जिसके जरिए शिक्षकों ने शीर्ष नेतृत्व का ध्यान अपनी जायज मांगों की ओर खींचने की कोशिश की।
21 साल की सेवा के बाद भी हताशा, संघ ने अधिकारियों की नीयत पर उठाए सवाल
गेस्ट टीचर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रधान कृष्ण धारसूल, महासचिव रघु वत्स, महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष मैना यादव और कुलदीप झरौली ने सरकार के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ आला अधिकारियों की हठधर्मिता और गलत फीडबैक के कारण मुख्यमंत्री और पूरी सरकार की जनहितैषी छवि को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं मोर्चा के मीडिया प्रभारी डॉ. अजय लोहान ने कहा कि पिछले 21 वर्षों से प्रदेश के नौनिहालों का भविष्य संवार रहे शिक्षकों को इस उम्र में हक से वंचित रखना सरासर अन्याय है। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देशों की भावना के अनुरूप फैसला नहीं बदला, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करने के लिए मजबूर होंगे।


