Yamunanagar Sarpanch News: यमुनानगर जिले के गांव दौलतपुर मालियान की बर्खास्त सरपंच पिंकी रानी को कानून के मोर्चे पर एक बार फिर मायूसी हाथ लगी है। दोहरे लाभ के पद (ओफिस ऑफ प्रॉफिट) पर बने रहने के आरोपों से घिरी पिंकी रानी की याचिका पर सुनवाई करते हुए मंडल आयुक्त अंबाला ने उनकी अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही उपायुक्त यमुनानगर द्वारा 21 जनवरी 2026 को जारी उस प्रशासनिक आदेश को बरकरार रखा गया है, जिसके तहत पिंकी रानी को सरपंच पद से पदच्युत कर दिया गया था।
शिकायत से खुला मामला, दोहरे मानदेय का लगा आरोप
इस पूरे विवाद का सिलसिला तब शुरू हुआ था जब गांव की ही निवासी ममतेश ने 27 अक्टूबर 2025 को जिला प्रशासन के समक्ष एक गंभीर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया था कि पिंकी रानी गांव की निर्वाचित सरपंच होने के साथ-साथ आशा वर्कर के रूप में भी अपनी सेवाएं जारी रखे हुए हैं और नियमविरुद्ध दोनों पदों का मानदेय उठा रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) सरस्वतीनगर से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त कार्यालय ने पिंकी रानी को कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक न मिलने पर 21 जनवरी को उन्हें पद से हटा दिया गया था।
रंजिश की दलील काम न आई, रिकॉर्ड ने खोली पोल
उपायुक्त के फैसले के खिलाफ पिंकी रानी ने मंडल आयुक्त अंबाला के न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। अपनी दलील में उन्होंने शिकायत को रंजिश और राजनीतिक गुटबाजी का परिणाम बताया। उन्होंने तर्क दिया कि आशा वर्कर कोई सरकारी या स्थानीय प्राधिकरण का पद नहीं है, बल्कि जनहित का काम है। हालांकि सुनवाई के दौरान जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) नरेंद्र सिंह द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड ने उनकी दलीलों की हवा निकाल दी। रिकॉर्ड से साफ हुआ कि पिंकी रानी ने चुनाव से पूर्व 12 अक्टूबर 2022 को आशा वर्कर के पद से इस्तीफा देने का दावा किया था, मगर चुनाव जीतते ही उन्होंने पद नहीं छोड़ा और कार्य जारी रखा। सभी साक्ष्यों को देखने के बाद मंडल आयुक्त ने अपील खारिज कर उपायुक्त की कार्रवाई को न्यायसंगत ठहराया।


