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Human Rights Commission: हरियाणा मानवाधिकार आयोग का बड़ा आदेश: सरकारी अस्पतालों के शवगृहों में 24 घंटे चालू रहने चाहिए फ्रीजर

Human Rights Commission: हरियाणा मानवाधिकार आयोग का बड़ा आदेश: सरकारी अस्पतालों के शवगृहों में 24 घंटे चालू रहने चाहिए फ्रीजर

फरीदाबाद सिविल अस्पताल में 4 फ्रीजर मिले बंद, मानवाधिकार आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने लिया कड़ा संज्ञान

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AAmandeep Singh

Human Rights Commission: इंसान की मौत के बाद उसके शव का सम्मानजनक संरक्षण करना न केवल एक कानूनी बाध्यता है, बल्कि यह बुनियादी मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा है। लेकिन हरियाणा के सरकारी अस्पतालों के शवगृहों से जो तस्वीरें और रिपोर्टें सामने आ रही हैं, वे व्यवस्थागत संवेदनहीनता की पोल खोलती हैं। इस बदहाली पर अब हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने कड़ा चाबुक चलाया है।

आयोग ने सूबे के सभी सरकारी अस्पतालों को दोटूक लहजे में निर्देश दिया है कि शवगृहों में लगे सभी फ्रीजर चैंबरों का न सिर्फ नियमित निरीक्षण किया जाए, बल्कि उन्हें हर वक्त चालू (कार्यशील) हालत में रखा जाए।

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इस संवेदनशील मामले पर यह तल्ख टिप्पणी और निर्देश आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने सोनीपत और फरीदाबाद से जुड़े दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान दिए।

आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी मृतक के शव के रखरखाव में लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अस्पतालों को याद दिलाया गया है कि जीवित इंसानों के इलाज के साथ-साथ मृतकों की गरिमा की रक्षा करना भी स्वास्थ्य संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।

सोनीपत और फरीदाबाद के मामलों ने खोली पोल, 14 में से 4 फ्रीजर मिले बंद

अस्पतालों की यह लापरवाही तब उजागर हुई जब पानीपत के जोगेंद्र सिंह ने आयोग का दरवाजा खटखटाया। उनकी शिकायत के मुताबिक, जुलाई 2024 में उनके 30 वर्षीय बेटे विकास की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी, जिसके पोस्टमार्टम के लिए शव को सोनीपत के सिविल अस्पताल भेजा गया।

आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त और चालू हालत में फ्रीजर न होने के चलते शव को सुरक्षित रखने और पहचान की प्रक्रिया में घोर लापरवाही बरती गई, जिससे पीड़ित परिवार को असहनीय मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ा। हालांकि, बाद में सिविल सर्जन ने अपनी रिपोर्ट में दलील दी कि सोनीपत अस्पताल में 8 डीप फ्रीजर हैं और जरूरत पड़ने पर खानपुर कलां मेडिकल कॉलेज की भी मदद ली जाती है, लेकिन तब तक पीड़ित परिवार सिस्टम का दंश झेल चुका था।

ऐसा ही एक दूसरा चौंकाने वाला मामला फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल से सामने आया। आयोग के समक्ष पेश हुई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अस्पताल में कुल 14 डेड बॉडी फ्रीजर चैंबर मौजूद हैं, लेकिन उनमें से 4 लंबे समय से बंद पड़े थे और केवल 10 ही काम कर रहे थे। गौर करने वाली बात यह है कि इस अस्पताल में हर दिन औसतन 5 से 10 शवों का पोस्टमार्टम किया जाता है। ऐसे में फ्रीजरों का बंद होना सीधे तौर पर लापरवाही को दर्शाता है।

‘यह कानूनी और मानवीय जिम्मेदारी’- लापरवाही बरतने वालों पर गिरेगी गाज

दोनों मामलों की विस्तृत रिपोर्ट खंगालने के बाद आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMOs) को सख्त गाइडलाइंस भेज दी गई हैं।

आयोग ने साफ कर दिया है कि भविष्य में अगर किसी भी सरकारी अस्पताल के शवगृह में तकनीकी खराबी या लापरवाही के कारण शव खराब होने या फ्रीजर बंद होने की शिकायत मिली, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य महकमे को अब हर महीने इन फ्रीजरों की वर्किंग रिपोर्ट सुनिश्चित करनी होगी, ताकि किसी भी मोर्चे पर ढिलाई न रह जाए।

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