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Haryana IDFC Bank Scam: IAS प्रदीप डागर रिटायरमेंट के दिन गिरफ्तार, 2 दिन की CBI रिमांड पर भेजे गए

Haryana IDFC Bank Scam: IAS प्रदीप डागर रिटायरमेंट के दिन गिरफ्तार, 2 दिन की CBI रिमांड पर भेजे गए

IDFC बैंक फ्रॉड में तीसरे IAS की गिरफ्तारी

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AAmandeep Singh

Haryana IDFC Bank Scam: हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे एक और सीनियर अधिकारी पर कानून का शिकंजा पूरी तरह कस गया। IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले की परतों को खंगाल रही सीबीआई ने लंबी लुका-छिपी के बाद आखिरकार आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार डागर को गिरफ्तार कर लिया।

दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन डागर का सरकारी सेवा से रिटायरमेंट था, उसी दिन वे कानून की गिरफ्त में आ गए। गिरफ्तारी के खौफ से डागर पिछले काफी समय से अंडरग्राउंड थे और उन्होंने पंचकूला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका भी डाल रखी थी, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई होनी थी। लेकिन सीबीआई ने अदालत के फैसले से पहले ही उनकी लोकेशन ट्रेस कर उन्हें हिरासत में ले लिया।

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डेटा एंट्री ऑपरेटर ने खोला था राज, शेल कंपनियों में गया पैसा

यह पूरा मामला हरियाणा सरकार के आठ अलग-अलग विभागों के लगभग 504 करोड़ रुपये को फर्जी एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) और शेल कंपनियों के जरिए ठिकाने लगाने से जुड़ा है। इसमें से सबसे बड़ी सेंधमारी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) में हुई, जहां अगस्त 2022 से दिसंबर 2025 तक प्रदीप डागर सदस्य सचिव के पद पर तैनात थे।

इस दौरान बोर्ड के खातों से 169 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। शुरुआती जांच में पुलिस ने जब एक डेटा एंट्री ऑपरेटर को पकड़ा, तो उसने कबूला कि एक रसूखदार आईएएस अफसर के सीधे निर्देश पर यह सरकारी पैसा चंडीगढ़ सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की शाखा में ट्रांसफर किया गया था, जहां से इसे शेल कंपनियों में भेजकर सफेद किया गया।

सीबीआई सूत्रों का बड़ा दावा:

“प्रदीप डागर लंबे समय से जांच एजेंसी के समन को नजरअंदाज कर रहे थे और सहयोग नहीं कर रहे थे। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत सरकार से मंजूरी मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। तत्कालीन चेयरमैन विनीत गर्ग भी अब जांच के दायरे में हैं और डागर से रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ में कुछ और बड़े आईएएस अफसरों के नामों का खुलासा होना तय माना जा रहा है।”

तीन आईएएस अंदर, जांच के दायरे में पूर्व चेयरमैन भी

हरियाणा सरकार की सिफारिश पर जब यह केस स्टेट विजिलेंस से सीबीआई को ट्रांसफर हुआ, तब से ही बड़ी मछलियों पर गाज गिरनी तय मानी जा रही थी। प्रदीप डागर इस घोटाले में गिरफ्तार होने वाले तीसरे आईएएस अधिकारी हैं।

इनसे पहले आईएएस आर.के. सिंह और पंकज अग्रवाल को भी केंद्रीय जांच एजेंसी सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है। सरकार ने डागर के रवैये को देखते हुए उन्हें इसी साल 8 अप्रैल को परिवहन विभाग के निदेशक पद से सस्पेंड कर दिया था। अब जांच की आंच बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन विनीत गर्ग तक पहुंच चुकी है, जिन्हें जल्द ही पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है।

गुरुग्राम से रोहतक तक अचल संपत्तियों का अंबार

जांच एजेंसियों के साथ-साथ डागर की संपत्तियों का ब्यौरा भी अब सार्वजनिक चर्चा में है। वर्ष 2025-26 के इमूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न (IPR) के मुताबिक, डागर और उनकी पत्नी के नाम पर करोड़ों रुपये के प्लॉट और फ्लैट्स हैं।

उनके ससुर वजीर सिंह द्वारा साल 2010 में रोहतक में तोहफे में दी गई 3,181 वर्ग गज जमीन है, जिसकी सरकारी कीमत 1.25 करोड़ दिखाई गई है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि पिछले 16 सालों में इस जमीन की मार्केट वैल्यू में रिकॉर्ड पर एक रुपये का भी इजाफा नहीं दर्शाया गया।

इसके अलावा, गुरुग्राम के पॉश सेक्टर-28 में दो महंगे प्लॉट हैं, जिनमें से एक की कीमत अब 1.20 करोड़ से ज्यादा है। सबसे ज्यादा सुर्खियां गुरुग्राम के एटलस प्लेटिनम टावर्स स्थित आलीशान फ्लैट नंबर ए-1702 को लेकर हैं। इस लग्जरी फ्लैट की घोषित कीमत ही करीब 3.34 करोड़ रुपये है, जो डागर और उनकी पत्नी सुनीता के संयुक्त नाम पर है, लेकिन चालाकी से इसकी खरीद की तारीख को प्रॉपर्टी रिटर्न के दस्तावेजों में खाली छोड़ दिया गया है।

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