Moonrise Time: अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र का प्रतीक महापर्व करवा चौथ इस बार सुहागिनों के लिए थोड़ा सा इम्तिहान भरा हो सकता है। हरियाणा के अलग-अलग शहरों में सुहागिनों को चांद के दीदार के लिए कुछ मिनटों का अंतर झेलना होगा।
भौगोलिक स्थिति के हिसाब से प्रदेश में सबसे पहले (Panchkula moonrise time Karwa Chauth) पंचकूला की महिलाओं को रात 8:12 बजे चांद के दर्शन होंगे, जबकि ठीक इसके विपरीत दक्षिणी छोर पर बसे (Rewari moonrise time) रेवाड़ी जिले की महिलाओं को सबसे अंत में रात 8:23 बजे तक इंतजार करना पड़ेगा। प्रदेशभर के विभिन्न जिलों में चंद्रोदय के इस समय में लगभग 11 मिनट का अंतर दर्ज किया गया है।
हिसार और अम्बाला में 08: 13 पर चाँद निकाएगा जबकि करनाल में 08: 15 और पानीपत में 08: 16 पर चाँद के दीदार होंगे वही फरीदाबाद में 08: 16 और गुरुग्राम में 08: 17 पर चाँद निकलेगा और रोहतक में 08: 19 और भिवानी में 08: 21 पर चाँद निकलेगा
लेकिन इन सबके बीच मौसम के मिजाज ने महिलाओं की धड़कनें थोड़ी बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने हरियाणा के 15 जिलों में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी कर रखा है। ऐसे में कई इलाकों में आसमान बादलों से घिरा रह सकता है। जानकारों का कहना है कि बादलों, कोहरे या ऊंची इमारतों की वजह से तय वक्त पर चांद नजर आने में 10 से 15 मिनट की अतिरिक्त देरी हो सकती है, जिससे व्रत खोलने के समय असमंजस की स्थिति बन सकती है।
बादल और बारिश रोड़ा बने तो क्या करें? (Haryana weather alert Karwa Chauth 2026)
यदि मौसम की बेरुखी से आसमान में चांद बादलों के पीछे छिप जाए, तो महिलाओं को निराश होने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। इस संबंध में ब्रह्मसरोवर परिसर स्थित कात्यायनी देवी मंदिर के संचालक पंडित बलराम गौतम ने बेहद महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बादलों या बारिश के कारण चांद के दर्शन न भी हो सकें, तब भी सुहागिनें बिना किसी संकोच के अपना व्रत खोल सकती हैं।
इसके लिए महिलाओं को बस इतना करना होगा कि वे पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान चंद्रमा का मानसिक ध्यान करें। धार्मिक और शास्त्र सम्मत मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य देने और उनका स्मरण करने के बाद व्रत का पारण करने की पूरी छूट और परंपरा है।
करवा, चंद्रमा और गणपति की पूजा का विधान (Karwa Chauth vrat vidhi without moon)
पंडित बलराम गौतम के अनुसार, करवा चौथ की पूजा में मिट्टी के पात्र यानी ‘करवा’ का विशेष महत्व होता है। इसमें शुद्ध जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान सुगंधित द्रव्य, सफेद पुष्प और अक्षत (चावल) का उपयोग अनिवार्य माना गया है। इसके साथ ही विघ्नहर्ता भगवान गणेश और चौथ माता की विधि-विधान से आराधना की जाती है। इन देवताओं का संकल्प लेकर की गई पूजा से व्रत पूर्ण माना जाता है, जिससे वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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