September 18, 2026

Haryana Roadways: “जिसे मर्जी भेज दो वीडियो, शाहाबाद में नहीं रुकेगी गाड़ी”, हरियाणा रोडवेज में दिव्यांग की बेअदबी

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Haryana Roadways: "जिसे मर्जी भेज दो वीडियो, शाहाबाद में नहीं रुकेगी गाड़ी"—हरियाणा रोडवेज में दिव्यांग की बेअदबी

"जिसे मर्जी भेज दो वीडियो, शाहाबाद में नहीं रुकेगी गाड़ी"

Haryana Roadways: हरियाणा रोडवेज की सरकारी बसों में यात्रियों की सहूलियत के दावे एक बार फिर धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। अंबाला बस स्टैंड से शाहाबाद जाने के लिए बस में चढ़े एक दिव्यांग यात्री बलबीर सिंह को कंडक्टर ने महज एक किलोमीटर दूरी तय करने के बाद सड़क किनारे उतार दिया। वजह सिर्फ यह बताई गई कि बस बैजनाथ (हिमाचल प्रदेश) से आ रही थी और ई-टिकटिंग मशीन में शाहाबाद का स्टॉपेज दर्ज नहीं था। यात्री द्वारा गिड़गिड़ाने और परिवहन मंत्री अनिल विज तक शिकायत पहुंचाने की बात कहने पर भी कंडक्टर का दिल नहीं पसीजा और उसने बेफिक्र अंदाज में यात्री को नीचे उतार दिया।

पैदल वापस लौटने को मजबूर हुआ पीड़ित, घंटों करना पड़ा दूसरी बस का इंतजार

पीड़ित दिव्यांग बलबीर सिंह ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह एक हाथ से लाचार है और उसे शाहाबाद से आगे जाना था। बस में सवार होने के कुछ ही देर बाद जब उसने टिकट की मांग की, तो झज्जर डिपो के कंडक्टर ने साफ कह दिया कि यह बस सीधे करनाल या दिल्ली के लिए ही सवारियां लेगी।

बलबीर ने जब मिन्नत की कि उसे शाहाबाद ही जाना है और वहां का टिकट काट दिया जाए, तो कंडक्टर ने दोटूक जवाब दिया कि मशीन में शाहाबाद की एंट्री नहीं है। विवाद बढ़ने पर कंडक्टर ने बस रुकवाकर उसे अंबाला बस स्टैंड से एक किलोमीटर आगे हाईवे पर उतार दिया। मजबूरन दिव्यांग यात्री को भीषण धूप में पैदल चलकर वापस अंबाला बस स्टैंड पहुंचना पड़ा और वहां से दूसरी बस पकड़नी पड़ी। इस पूरी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

“मेरी मशीन में स्टॉप नहीं, मैं क्या करूं?”—वीडियो वायरल होने के बाद कंडक्टर की सफाई

सोशल मीडिया पर मामला तूल पकड़ते ही झज्जर डिपो में तैनात कंडक्टर विजय कुमार ने भी अपना एक वीडियो जारी कर विभागीय स्थिति स्पष्ट की। कंडक्टर ने टिकट मशीन का प्रिंट और रूट चार्ट दिखाते हुए दावा किया कि लंबे रूट (बैजनाथ से दिल्ली) की बसों में कई छोटे शहरों या स्टॉपेज का जिक्र ई-टिकटिंग मशीन में नहीं होता है।

कंडक्टर का कहना था कि यदि मशीन में शाहाबाद का कोड ही नहीं है, तो वह फर्जी या गलत टिकट जारी नहीं कर सकता। हालांकि, अपनी कड़क बोली और दिव्यांग यात्री को बीच सफर में उतारने के रवैये पर अफसोस जताते हुए कंडक्टर ने कहा कि उसे यात्री के दिव्यांग होने का अंदाजा नहीं हो सका था। उसने विभाग से मांग की कि दिल्ली रूट की सभी बसों में प्रमुख शहरों के स्टॉपेज को मशीन में अपडेट किया जाए ताकि रोज-रोज यात्रियों और कर्मचारियों के बीच होने वाली तू-तू-मैं-मैं से बचा जा सके।

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