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Himachal Pradesh: हिमाचल में बनी 82 दवाएं जांच में फेल, इनमे से 52 दवाएं सैंपल के, यहां देखें पूरी लिस्ट

Himachal Pradesh: हिमाचल में बनी 82 दवाएं जांच में फेल, इनमे से 52 दवाएं सैंपल के, यहां देखें पूरी लिस्ट

हिमाचल में बनी 82 दवाएं जांच में फेल

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VVinita Kohli

Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योगों में बनी 82 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरने की बात सामने आई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के ड्रग अलर्ट में शामिल सैंपलों में बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ समेत प्रदेश के कई फार्मा उत्पादन केंद्रों में बनी दवाएं शामिल हैं। CDSCO की व्यवस्था में NSQ यानी Not of Standard Quality का मतलब है कि संबंधित सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानक या स्पेसिफिकेशन के अनुरूप नहीं पाया गया। इन 82 सैंपलों में 52 दवाएं बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) क्षेत्र की बताई गई हैं। देश के बड़े फार्मा उत्पादन केंद्रों में शामिल BBN से इतनी संख्या में सैंपल फेल होने से दवा निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठते हैं।

 

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किन बीमारियों की दवाएं सूची में शामिल

फेल सैंपलों में अलग-अलग बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दर्द-बुखार, बैक्टीरियल संक्रमण, गैस-एसिडिटी, एनीमिया, एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याओं की दवाएं बताई गई हैं। विटामिन, कैल्शियम और अन्य सप्लीमेंट वाली दवाओं के सैंपल भी गुणवत्ता जांच में फेल हुए हैं। सूची में टैबलेट के अलावा इंजेक्शन, सिरप, क्रीम और जैल जैसे अलग-अलग डोज फॉर्म शामिल हैं।

 

एंटीबायोटिक दवाओं के सैंपल भी फेल

बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ एंटीबायोटिक दवाओं के सैंपल भी गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें एमोक्सिसिलिन, एमोक्सिसिलिन-पोटेशियम क्लैवुलनेट, सेफिक्सिम, सेफपोडोक्सिम, ऑफ्लॉक्सासिन और एजिथ्रोमाइसिन से जुड़े उत्पाद शामिल बताए गए हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल अलग-अलग बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में किया जाता है। हालांकि, किसी सैंपल के NSQ पाए जाने का मतलब यह नहीं है कि उस दवा के हर पैक या हर बैच से मरीज को नुकसान होगा। यह निष्कर्ष संबंधित बैच और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जाता है, इसलिए मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना अपनी दवा बंद नहीं करनी चाहिए।

 

हार्ट, BP और डायबिटीज की दवाएं भी सूची में

हृदय रोग और ब्लड प्रेशर से जुड़ी कुछ दवाओं के सैंपल भी जांच में फेल बताए गए हैं। इनमें क्लोपिडोग्रेल-एस्पिरिन, एटोरवास्टेटिन-क्लोपिडोग्रेल और कार्वेडिलोल से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। क्लोपिडोग्रेल-एस्पिरिन का इस्तेमाल ब्लड क्लॉट से जुड़े जोखिम को कम करने के लिए किया जाता है, जबकि एटोरवास्टेटिन-क्लोपिडोग्रेल और कार्वेडिलोल का इस्तेमाल हृदय रोग तथा संबंधित स्थितियों में किया जाता है। डायबिटीज की दवाओं में ग्लिक्लाजाइड समेत कुछ अन्य उत्पादों के सैंपल भी गुणवत्ता जांच में फेल बताए गए हैं।

 

क्रीम और जैल में सक्रिय दवा की मात्रा कम मिली

जांच में त्वचा रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले कुछ क्रीम और जैल में भी गुणवत्ता संबंधी कमियां सामने आईं। एक बेटामेथासोन वैलेरेट ऑइंटमेंट में सक्रिय दवा की मात्रा 73.7% और एक अन्य क्रीम में क्लोरहेक्सिडिन की मात्रा 51.5% बताई गई है। कुछ इंजेक्शन भी निर्धारित गुणवत्ता परीक्षण पास नहीं कर सके। कंपाउंड सोडियम लैक्टेट इंजेक्शन के दो अलग-अलग बैच स्टेरिलिटी टेस्ट में फेल बताए गए, जबकि कुछ अन्य इंजेक्शन pH, पार्टिकुलेट मैटर, अस्से और क्लैरिटी जैसे परीक्षणों में असफल रहे।

 

एनीमिया, कैल्शियम और विटामिन की दवाएं भी जांच में फेल

एनीमिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली फेरस एस्कॉर्बेट और फोलिक एसिड की कुछ गोलियां भी NSQ पाई गईं। इसके अलावा फोलिक एसिड, कैल्शियम-विटामिन D3, मिथाइलकोबालामिन, जिंक और अन्य विटामिन कॉम्बिनेशन वाली दवाओं के सैंपल भी सूची में शामिल हैं। CDSCO की ड्रग-अलर्ट व्यवस्था में ऐसे सैंपलों को NSQ के तौर पर सूचीबद्ध किया जाता है। CDSCO के मुताबिक, दवा की गुणवत्ता जांच के लिए उसके विभिन्न क्षेत्रीय और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में परीक्षण किए जाते हैं; चंडीगढ़ स्थित RDTL भी हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों से लिए गए ड्रग सैंपलों की जांच करता है।

 

मरीज क्या करें, दवा खुद से बंद न करें

किसी दवा का सैंपल NSQ पाए जाने की खबर के बाद मरीजों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के अपनी नियमित दवा अचानक बंद न करें। खासकर हार्ट, BP, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं को रोकने या बदलने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से संबंधित ब्रांड, बैच नंबर और दवा की निर्माता कंपनी की पुष्टि करनी चाहिए। सिर्फ किसी कंपनी का नाम या दवा का नाम अलर्ट में होने से यह साबित नहीं होता कि उस कंपनी की हर दवा या हर बैच खराब है। CDSCO की सूची में दर्ज विशिष्ट सैंपल और बैच की जानकारी देखकर ही यह तय किया जा सकता है कि संबंधित दवा प्रभावित सूची में है या नहीं।

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