Hisar News: हरियाणा के हिसार में आशियाने का सपना संजोने वाले पूर्व सैनिकों और मध्यमवर्गीय परिवारों के साथ बड़े धोखे का मामला सामने आया है। ‘दी सूरजमुखी कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड’ के सैकड़ों प्लॉट धारकों में कॉलोनाइजर के रवैये को लेकर गहरा असंतोष व्याप्त है। कॉलोनाइजर द्वारा बीते कई वर्षों से जमीनों की रजिस्ट्री सोसाइटी के नाम न किए जाने से नाराज प्लॉट धारकों ने अब सड़क से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। रविवार को हुई सोसाइटी की जनरल बॉडी मीटिंग (आम सभा) में यह ज्वलंत मुद्दा छाया रहा।
फौजियों और जिंदल कर्मचारियों का आशियाना दांव पर
सोसाइटी के प्रधान कैप्टन रामपाल ने मामले की परतें खोलते हुए बताया कि कॉलोनाइजर गुलशन कुमार सिंगला द्वारा साल 2010 से 2020 के दौरान हिसार कैंट, सातरोड कलां और मायड़ इलाके में करीब 8 से 9 कॉलोनियां बसाई गई थीं। इनमें न्यू सैनिक कैंट मार्केट, न्यू विकास नगर, रामदयाल जांगड़ा कॉलोनी, सज्जन कॉलोनी, सुबे सिंह कॉलोनी, मस्तानाथ क्षेत्र और न्यू सैनिक बिहार-1, 11, 12 प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इन कॉलोनियों में मौजूदा समय में 50 प्रतिशत से अधिक परिवार अपने मकान बनाकर रह रहे हैं। यहां प्लॉट खरीदने वालों में सबसे बड़ी संख्या देश की रक्षा करने वाले सेवारत व सेवानिवृत्त फौजियों और जिंदल स्टील के कर्मचारियों की है। कॉलोनाइजर ने प्लॉट धारकों से पूरी रकम ऐंठकर उन्हें ‘दी सूरजमुखी सोसाइटी’ के नाम से अलॉटमेंट कार्ड तो थमा दिए, लेकिन मूल जमीन को कानूनी रूप से सोसाइटी के नाम पंजीकृत कराने में लगातार टालमटोल की जा रही है।
लिखित वादे से मुकरने और झूठा बहाना बनाने का आरोप
सोसाइटी सदस्यों के मुताबिक, 5 अक्टूबर 2025 को हुई आम सभा में कॉलोनाइजर गुलशन सिंगला और उनके बेटे विवेक सिंगला ने खुद माना था कि वे अपने खर्च पर पूरी जमीन सोसाइटी के नाम ट्रांसफर करवा देंगे। इस वादे की वीडियो रिकॉर्डिंग और मीटिंग रजिस्टर में उनके बाकायदा दस्तखत भी मौजूद हैं। इसके बाद सितंबर 2026 में जब वकीलों के जरिए एग्रीमेंट तैयार कराया गया, तो कॉलोनाइजर अपने वादे से साफ मुकर गए।
हद तो तब हो गई जब 25 अक्टूबर को बुलाई गई बैठक में शामिल होने के लिए उन्हें फोन किया गया। कॉलोनाइजर ने चंडीगढ़ अस्पताल में भर्ती होने की बात कहकर आने से पल्ला झाड़ लिया। लेकिन जब कुछ सदस्य उनके दफ्तर पहुंचे, तो वे वहीं मौजूद मिले। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सदस्यों ने आरोप लगाया है कि कॉलोनाइजर की नीयत में खोट आ चुका है और वह जानबूझकर फौजी परिवारों की मेहनत की कमाई हड़पना चाहता है।
अब विधायक से गुहार, प्रशासन से होगी सीधी बात
सोसाइटी के प्रधान कैप्टन रामपाल ने दोटूक कहा, “हम पिछले 4 साल से शांतिपूर्वक तरीके से जमीन ट्रांसफर कराने का प्रयास कर रहे हैं। यहां रहने वाले ज्यादातर लोग फौजी और सीधे-सादे मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। आम सभा में यह फैसला हुआ है कि इस पूरे मामले से स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन को अवगत कराया जाएगा, ताकि प्रशासनिक दबाव बनाकर हमारे हक का निपटारा कराया जा सके।”
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