Haryana News: धान की कटाई से खाली हुए खेतों में अब रबी फसल की बुआई का दौर शुरू हो चुका है। किसान भाइयों के लिए गेहूं की अच्छी पैदावार हासिल करने का आधार शुरुआत में ही तैयार होता है। सही बीज का चुनाव, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और बिजाई का सटीक तरीका ही यह तय करता है कि आने वाले दिनों में फसल की बढ़वार कैसी रहेगी। इसी कड़ी में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU Hisar Wheat Advisory) हिसार के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है।
विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, 25 अक्टूबर से 10 नवंबर तक का समय अगेती बुआई के लिए सबसे मुफीद माना जाता है। सिंचित और उपजाऊ जमीनों पर किसान WH 1270, PBW 872, DBW 327 और DBW 303 जैसी ज्यादा उपज देने वाली किस्मों की बिजाई कर सकते हैं। वहीं, अगर किसान समय पर बिजाई कर रहे हैं, तो उनके लिए WH 1105, PBW 826 और HD 3086 का चयन करना ज्यादा फायदेमंद साबित होगा।
मिट्टी जांच के आधार पर दें खाद, पहली सिंचाई पर डालें बची हुई नाइट्रोजन
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी खेत की मिट्टी की जांच के आधार पर ही खादों का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि सिंचित जमीनों पर बौनी किस्मों की बिजाई के समय प्रति एकड़ 30 किलोग्राम नाइट्रोजन, 24 किलोग्राम फास्फोरस, 24 किलोग्राम पोटाश और 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट डालना चाहिए। वहीं बची हुई 30 किलोग्राम नाइट्रोजन की खुराक पहली सिंचाई के वक्त दी जानी चाहिए।
देसी किस्मों की खेती करने वाले किसानों के लिए प्रति एकड़ 24 किलोग्राम नाइट्रोजन, 12 किलोग्राम फास्फोरस और तय मात्रा में पोटाश व जिंक सल्फेट का इस्तेमाल पर्याप्त रहता है। वैज्ञानिकों ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि बिजाई से पहले बीज का उपचार (सीड ट्रीटमेंट) जरूर करें, ताकि फसल को शुरुआती फफूंद और अन्य बीमारियों से बचाया जा सके।
ड्रिल मशीन से करें बिजाई, बीज की गहराई और कतारों की दूरी का रखें ध्यान
गेहूं अनुभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य बिजाई के लिए प्रति एकड़ 40 किलोग्राम बीज का इस्तेमाल करें। (Fertilizer Doses Wheat Per Acre) अगर बिजाई पछेती (देरी से) हो रही है, तो बीज की मात्रा 25 प्रतिशत तक बढ़ा देनी चाहिए। वहीं मोटे दाने वाली किस्मों के लिए 50 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से बीज की दर तय करें।
बिजाई हमेशा ‘सीड सह फर्टिलाइजर ड्रिल’ से ही करें और कतार से कतार (लाइन से लाइन) की दूरी 20 सेंटीमीटर बनाए रखें। गहराई के मामले में सावधानी बरतते हुए C-306 जैसी देसी किस्मों को 6 से 7 सेंटीमीटर और अन्य आधुनिक किस्मों को करीब 5 सेंटीमीटर की गहराई पर ही बोएं, ताकि अंकुरण सुचारू रूप से हो सके।
गुल्ली-डंडा और कनकी से बचाएगी सही दवा, बिजाई के तुरंत बाद करें छिड़काव
गेहूं की फसल में कनकी (गुल्ली-डंडा) और अन्य चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों का प्रकोप पैदावार को भारी नुकसान पहुंचाता है। HAU के गेहूं अनुभाग के अध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि खरपतवार नियंत्रण के लिए शुरुआती कदम उठाना बेहद जरूरी है।
बिजाई के तुरंत बाद (फसल उगने से पहले) ‘पेंडीमेथालिन 30 EC’ दवा का 2 लीटर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर देना चाहिए। इसके बाद बिजाई के 30 से 35 दिन बीतने (Gehu Ki Bijai Ka Samay) पर खेत में खरपतवार की स्थिति को देखते हुए अनुशंसित दवा का प्रयोग करें। दवा का घोल और छिड़काव की मात्रा हमेशा विश्वविद्यालय की सिफारिशों और उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार ही रखें।
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