Karnal News: करनाल के मेरठ रोड से शनिवार को एक बेहद डराने वाली तस्वीर सामने आई। यहां स्थित भारतीय जनता पार्टी के सीनियर नेता और व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन सतीश गुप्ता की ‘श्री राम एग्रो फैक्ट्री’ में अचानक भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी भयंकर थीं कि देखते ही देखते उसने पूरी फैक्ट्री को अपनी आगोश में ले लिया।
आसमान में उठते काले धुएं के गुबार को कई किलोमीटर दूर से ही साफ देखा जा सकता था। घटना के वक्त फैक्ट्री में कई मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें आग भड़कते ही जान बचाने की अफरा-तफरी मच गई।
कर्मचारियों ने की काबू पाने की कोशिश, हालात बिगड़ते ही बुलाई गई फायर ब्रिगेड
फैक्ट्री के स्टाफ और मौजूद कर्मचारियों ने शुरुआत में अपने स्तर पर आग बुझाने की जद्दोजहद की, लेकिन आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि सूखी लपटों के सामने उनके सारे इंतजाम नाकाफी साबित हुए। इसके बाद तुरंत मामले की इत्तला स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग को दी गई।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सायरन बजाती हुई मौके पर पहुंचीं और राहत बचाव कार्य (रेस्क्यू) शुरू किया गया। मौके पर पहुंचे सब इंस्पेक्टर तरसेम सिंह ने बताया कि दमकल की टीमें लगातार मुस्तैदी के साथ आग पर काबू पाने की कोशिशों में जुटी हुई हैं।
केमिकल के ड्रम बाहर निकाले; पेट्रोल पंप खाली कराकर टाली गई बड़ी अनहोनी
इस पूरे हादसे में सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री के भीतर रखा ज्वलनशील सामान था। राहत की बात यह रही कि दमकल कर्मियों और स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए परिसर के अंदर रखे केमिकल के ड्रमों को वक्त गंवाए बिना सुरक्षित बाहर खींच लिया।
अगर इन ड्रमों तक आग पहुंच जाती, तो एक बड़ा धमाका हो सकता था जिससे आसपास की आबादी को भारी नुकसान पहुंचता। पुलिस ने एहतियात बरतते हुए मेरठ रोड की एक तरफ की सड़क को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया और फैक्ट्री के नजदीक बने पेट्रोल पंपों को भी तुरंत खाली करवा दिया गया।
शार्ट सर्किट की आशंका; आग ठंडी होने के बाद ही साफ होगी नुकसान की पूरी तस्वीर
यह फैक्ट्री इलाके के रसूखदार नेता और कारोबारी सतीश गुप्ता की होने के कारण प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि आग लगने की मुख्य वजह क्या थी, लेकिन प्रथम दृष्टया इसे शॉर्ट सर्किट से जोड़कर देखा जा रहा है। हादसे में करोड़ों रुपये के माल और मशीनरी के जलकर खाक होने का अनुमान है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एक बार आग पूरी तरह शांत हो जाए, उसके बाद ही नुकसान का सही पैमाना सामने आ सकेगा। फिलहाल फैक्ट्री प्रबंधन की लिखित शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी और तकनीकी जांच शुरू की जाएगी।
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