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Karnal Sports: करनाल के मुक्केबाज गंगा ने जकार्ता में रचा इतिहास, वर्ल्ड चैंपियन को हराकर जीता एशियन गोल्ड

Karnal Sports: करनाल के मुक्केबाज गंगा ने जकार्ता में रचा इतिहास, वर्ल्ड चैंपियन को हराकर जीता एशियन गोल्ड

करनाल के मुक्केबाज गंगा ने जकार्ता में रचा इतिहास

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GGaganpreet Kaur

Karnal Sports: हरियाणा की माटी ने देश को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर गौरवान्वित होने का सुनहरा अवसर दिया है। करनाल के उभरते हुए युवा मुक्केबाज गंगा ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित 23वीं एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में अपनी मुक्कों की धमक दिखाते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। अंडर-23 वर्ग के बेहद चुनौतीपूर्ण 55 किलोग्राम भारवर्ग के खिताबी मुकाबले में गंगा का सामना कजाकिस्तान के बेहद आक्रामक यूथ वर्ल्ड चैंपियन बेक्सुलात्न बोरानबेक से था।

16 जुलाई को खेले गए इस महामुकाबले में गंगा ने अपनी गजब की तकनीक और रक्षात्मक कौशल का परिचय देते हुए बोरानबेक को पस्त किया और गोल्ड मेडल भारत की झोली में डाल दिया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद गंगा परसों यानी 19 जुलाई को देश वापस लौटेंगे, जहां उनके भव्य स्वागत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

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पढ़ाई की खातिर छूटा था दस्ताना, लेकिन जुनून ने कराई रिंग में वापसी

गंगा की इस अभूतपूर्व सफलता का सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। महज 8 साल की कोमल उम्र में मुक्केबाजी के दस्ताने पहनने वाले गंगा को बीच सफर में एक बड़ा गतिरोध झेलना पड़ा था। बोर्ड परीक्षाओं और पढ़ाई के भारी दबाव के कारण उन्हें कुछ समय के लिए खेल से दूरी बनानी पड़ी थी। लेकिन रगों में बहते मुक्केबाजी के जुनून को वे ज्यादा दिनों तक खुद से दूर नहीं रख सके। साल 2019 में उन्होंने दोगुनी ऊर्जा के साथ रिंग में वापसी की। कोच की सख्त देखरेख और कड़े अनुशासन के दम पर उन्होंने कुछ ही वर्षों में जिला स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का फासला बेहद शानदार तरीके से तय किया।

देश का अनोखा ‘स्पोर्ट्स फैमिली’: घर में ही मौजूद हैं दो ओलंपिकर्स

गंगा की जीत के साथ ही करनाल स्थित उनके घर पर बधाइयों का तांता लगा हुआ है। दरअसल, गंगा का पूरा परिवार ही खेल की दुनिया को समर्पित है। उनके बड़े भाई निशांत देव खुद एक स्थापित अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज हैं और ओलंपिक में भारत की तरफ से हुंकार भर चुके हैं। वहीं, उनके छोटे भाई रुद्र भी पैरा ओलंपिक में देश की नुमाइंदगी कर चुके हैं। गंगा अपने बड़े भाई निशांत को ही अपना गुरु और आदर्श मानते हैं।

पिता विनोद कुमार ने बेहद गर्व के साथ बताया कि गंगा की इस सफलता के पीछे उनके बड़े भाई निशांत का बहुत बड़ा हाथ है। निशांत लगातार गंगा को अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के दबाव को झेलने, डाइट चार्ट फॉलो करने और रिंग के भीतर अंतिम सेकेंड्स में पैंतरा बदलने की बारीकियां सिखाते रहते हैं। पिता के अनुसार, गंगा के बचपन की जिद और मुक्केबाजी के प्रति उनके दीवानेपन ने ही आज उन्हें एशिया का नया सुल्तान बनाया है।

रिंग के राजा: गंगा के स्वर्णिम करियर पर एक नजर

गंगा का सफर केवल इस एक पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी कैबिनेट पहले से ही चमचमाते पदकों से भरी पड़ी है:

अंतरराष्ट्रीय फतह: 2026 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप (जकार्ता) में स्वर्ण, इसके अलावा सर्बिया और ऑस्ट्रेलिया के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भी देश के लिए पीला तमगा जीता।

राष्ट्रीय स्तर पर दबदबा: सीनियर नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में लगातार दो बार स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर अपना लोहा मनवाया।

घरेलू सर्किट के बादशाह: आरईसी ओपन, ऑल इंडिया और यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल हासिल किए।

शुरुआती सफर: यूथ हरियाणा बॉक्सिंग चैंपियनशिप में दो बार के स्टेट चैंपियन और साल 2019 के स्कूल नेशनल गेम्स में कांस्य पदक विजेता।

अगली चुनौती: हाल ही में जुलाई 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने एशियन गेम्स के लिए भी सीधे क्वालिफाई किया है।

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