KUK Ratnavali Mahotsav: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रांगण में इन दिनों लोक संस्कृति, परंपराओं और मातृभाषा का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जो हर किसी का मन मोह रहा है। मौका है प्रदेश के सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सव ‘रत्नावली महोत्सव’ का, जहां 1 से 4 नवंबर तक हरियाणा के कोने-कोने से पहुंचे युवा कलाकार अपनी कला का जादू बिखेर रहे हैं। आधुनिकता की दौड़ के बीच इस महोत्सव ने साबित कर दिया है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी बोली, पहनावे और लोक विरासत को लेकर कितनी जागरूक और उत्साहित है।
33 विधाओं में हो रहा हुनर का प्रदर्शन, ‘हरियाणवी मीडिया चौपाल’ बनी खास केंद्र
इस चार दिवसीय महोत्सव में कुल 33 अलग-अलग विधाओं के जरिए छात्र अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कोई पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे नजर आ रहा है, तो कोई लोकगीतों और नाटकों के जरिए हरियाणा की मिट्टी की खुशबू को मंच पर उतार रहा है। इस बार हिंदी विभाग की ओर से संचालित ‘हरियाणवी मीडिया चौपाल’ युवाओं और पर्यटकों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सुबह से लेकर शाम तक इस मंच पर लोगों की आवाजाही लगी रहती है, जहां प्रतिभागी बेबाकी से अपनी हरियाणवी बोली में विचार रख रहे हैं। हिंदी विभाग की छात्रा रचना का कहना है कि ऐसे आयोजन युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ने का सबसे बेहतरीन माध्यम हैं।
‘मेरो खोय गयो बाजूबंद’ गीत और रसिया नृत्य पर झूमा कुरुक्षेत्र
मच पर जब तीसरे दिन ग्रुप डांस ‘रसिया’ प्रतियोगिता शुरू हुई, तो पूरा परिसर हरियाणवी रंग में रंग गया। कैथल के आरकेएसडी पीजी कॉलेज और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय समेत कई टीमों ने इसमें हिस्सा लिया। पुरुष कलाकार धोती-कुर्ता, पगड़ी और कमरबंद में दिखे, तो महिलाओं ने दामण-कुर्ती और पारंपरिक आभूषणों से अपनी छटा बिखेरी। प्रस्तुति के दौरान घुंघरू, ढोलक और हारमोनियम के साथ-साथ छाज और टोकणी जैसी ग्रामीण जिंदगी की वस्तुओं का बखूबी इस्तेमाल किया गया। ‘मेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होली में’ गीत पर कलाकारों ने महिलाओं और पुरुषों के बीच लट्ठमार होली का ऐसा सजीव मंचन किया कि दर्शक तालियां बजाने पर मजबूर हो गए।
अपनी पहचान को संजोने का सशक्त माध्यम बन रहा महोत्सव
रत्नावली केवल एक सांस्कृतिक प्रतियोगिता भर नहीं है, बल्कि यह हरियाणा की लुप्त होती लोककला और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक बड़ा अभियान बन चुका है। छात्रा मनीषा मानती हैं कि यह मंच विद्यार्थियों को अपनी कला के जरिए एक अलग पहचान बनाने का अवसर देता है। यहां युवा यह संदेश दे रहे हैं कि हरियाणवी बोली और संस्कृति ही इस प्रदेश की असली शान है, जिसे वे नए और आधुनिक अंदाज में आगे बढ़ाने का पूरा दम रखते हैं।
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