Kurukshetra Bhadrakali temple: कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक और प्रदेश के एकमात्र शक्तिपीठ श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आस्था और कला का अनूठा संगम देखने को मिला। पर्व के पहले दिन मंदिर में मां की प्रतिमा को 2.25 किलो चांदी से तैयार की गई विशेष गोल्ड प्लेटेड पोशाक अर्पित की गई, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे। इस अनूठी भेंट के साथ ही प्रशासन ने कुरुक्षेत्र की धार्मिक पहचान को और मजबूत करते हुए मंदिर मार्ग का नाम बदलने का बड़ा ऐलान भी कर दिया है।
सपने और प्रेरणा से तैयार हुई चांदी की यह विशेष पोशाक
मंदिर के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा की पुत्रवधू निकुंज शर्मा ने इस अद्भुत पोशाक को तैयार कराने की पूरी पहल की। गुजरात के एक मंदिर में भगवान के ऐसे स्वरूप के दर्शन करने और उसी रात सपने में मां भद्रकाली को इसी रूप में देखने के बाद उनके मन में यह विचार आया था। परिवार की सहमति मिलने के बाद गुजरात के तीन कुशल कारीगरों ने दिन-रात मेहनत कर इसे पंद्रह दिनों में तैयार किया। यह पोशाक किसी अलग टुकड़े को जोड़ने के बजाय सीधे चांदी की ठोस प्लेट पर ही तराशी गई है, जिस पर की गई सुनहरी पॉलिश इसे असली सोने जैसी चमक देती है।
मां के आठ रूपों और भगवान श्रीकृष्ण की परंपरा का अनूठा मेल
इस पोशाक के डिजाइन में धार्मिक मान्यताओं और कला का बेहद बारीक तालमेल देखने को मिलता है। मां भद्रकाली के श्याम स्वरूप को ध्यान में रखते हुए पोशाक के विभिन्न हिस्सों में नीले और लाल रंग के कुल 108 नग जड़े गए हैं, जो मां के आठ रूपों और त्रिशक्ति का प्रतीक हैं। इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण को मां भद्रकाली का कुल देवता मानने की परंपरा के तहत इस पर मोर और मोरपंख के सुंदर आभूषण रूपी डिजाइन उकेरे गए हैं। उत्तर भारत के किसी भी मंदिर में इस तरह की बारीक कारीगरी से बनी गोल्ड प्लेटेड पोशाक पहली बार अर्पित की गई है।
शक्तिपीठ का पौराणिक इतिहास और झांसा रोड का बदला नाम
कुरुक्षेत्र का यह मंदिर देश के 52 शक्तिपीठों में शुमार है, जहां पौराणिक कथाओं के अनुसार माता सती का दायां टखना गिरा था। मुख्य प्रतिमा के ठीक सामने स्थित पवित्र कुएं और महाभारत काल में पांडवों द्वारा विजय प्राप्ति के लिए घोड़े अर्पित करने की परंपरा इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ाती है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन निकाली गई भव्य शोभायात्रा के दौरान पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने पुराने बस स्टैंड से मंदिर तक जाने वाली झांसा रोड का नाम बदलकर ‘मां भद्रकाली शक्तिपीठ मार्ग’ करने की आधिकारिक घोषणा की। इस बदलाव से श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में एक नई धार्मिक पहचान और सुगमता मिलेगी।
यह भी पढ़ें– हरियाणा में बदला मौसम का मिजाज, कई जिलों में झमाझम बारिश से लुढ़का पारा

