Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र जिले में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले जनप्रतिनिधियों पर प्रशासन का चाबुक चलना शुरू हो गया है। उपायुक्त एवं जिलाधीश विश्राम कुमार मीणा ने कड़ा रुख अपनाते हुए थानेसर खंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कंवारखेड़ी की महिला सरपंच को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। यह कड़ी कार्रवाई गांव में कराए गए विकास कार्यों में भारी वित्तीय गड़बड़ी, पंचायत फंड के दुरुपयोग और जांच एजेंसियों को गुमराह करने की विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर अमल में लाई गई है।
ग्रामीण की शिकायत पर गठित हुई थी जांच कमेटी, मौके पर खुली धांधली की पोल
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कंवारखेड़ी निवासी एक ग्रामीण ने उपायुक्त कार्यालय में शपथ पत्र के साथ सरपंच के खिलाफ विकास कार्यों में भारी अनियमिताओं और सरकारी खजाने को चपत लगाने की लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उपायुक्त ने जिला परिषद के उपमंडल अभियंता (SDE) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया था। जांच टीम जब 6 अक्टूबर को शिकायतकर्ता और गांव के मोजिज लोगों को साथ लेकर मौके पर भौतिक सत्यापन करने पहुंची, तो वहां कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और कागजी आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर मिला। इतना ही नहीं, जांच प्रक्रिया के दौरान सरपंच ने कमेटी को पंचायत का जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में भी आनाकानी की और कोई सहयोग नहीं दिया।
सुनवाई में भी नहीं दे पाईं सफाई, निलंबन अवधि में पंचायत बैठकों से रहेंगी दूर
जांच कमेटी की रिपोर्ट में पंचायत फंड और सार्वजनिक धन के गबन के गंभीर निष्कर्ष सामने आने के बाद उपायुक्त कार्यालय ने सरपंच को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका दिया। हालांकि, व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान भी सरपंच अपने बचाव में कोई संतोषजनक जवाब या रिकॉर्ड से जुड़ा साक्ष्य पेश नहीं कर सकीं। इसके बाद उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने निलंबन के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन की इस अवधि के दौरान सरपंच ग्राम पंचायत के किसी भी प्रशासनिक या विकास कार्य की कार्रवाई में हिस्सा नहीं ले सकेंगी, साथ ही पंचायत से जुड़ा सारा रिकॉर्ड तुरंत संबंधित अधिकारियों को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।


