Kurukshetra News: खाकी वर्दी से सेवानिवृत्त होने के बाद भी अपने साथियों के प्रति एकजुटता और वफादारी की एक बानगी मंगलवार को कुरुक्षेत्र में देखने को मिली। लाडवा थाने में तैनात रहे दो एएसआई और एक होमगार्ड जवान पर हाल ही में गाज गिरी थी, जिसके विरोध में अब पूरा रिटायर्ड पुलिस संगठन लामबंद हो गया है।
कुरुक्षेत्र एसपी कार्यालय के सामने जुटे पूर्व पुलिस अफसरों का कहना है कि पुलिसकर्मियों पर की गई यह कार्रवाई जल्दबाजी में ली गई प्रतीत होती है। उन्होंने साफ किया कि वे जांच के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही कर्मचारियों को निलंबित कर देना और उन पर मुकदमा ठोक देना उनका मनोबल तोड़ने जैसा है।
“पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर बढ़े बुजुर्गों की पेंशन”
धरने को संबोधित करते हुए संगठन के प्रधान महेंद्र सिंह ने न केवल सस्पेंडेड पुलिसकर्मियों का मुद्दा उठाया, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सालों से लंबित मांगों को भी प्रखरता से सरकार के सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब महंगाई और बीमारियां आसमान छू रही हैं, तब पूर्व पुलिसकर्मियों को मिलने वाला मेडिकल भत्ता ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। संगठन ने मांग की है कि वर्तमान मेडिकल भत्ते को बढ़ाकर तुरंत 5,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए और सभी गंभीर बीमारियों के लिए कैशलेस इलाज की पक्की सुविधा दी जाए।
पंजाब-हिमाचल मॉडल लागू करने की मांग:
“रिटायर्ड पुलिस संगठन ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि पंजाब और हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर यहां भी बुजुर्ग पेंशनरों को राहत दी जाए। जैसे ही पूर्व कर्मचारी की उम्र 65, 70, 75 और 80 वर्ष पूरी हो, वैसे ही उनकी मूल पेंशन में क्रमशः 5, 10, 15 और 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी स्वतः लागू होनी चाहिए।”
बच्चों की शिक्षा और नौकरियों में मांगा हक
इस प्रदर्शन के जरिए पूर्व पुलिसकर्मियों ने अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भी आवाज बुलंद की। वर्तमान में पुलिस लाइन के डीएवी स्कूल में पुलिसकर्मियों के बच्चों को मिलने वाली 25 फीसदी फीस छूट को नाकाफी बताते हुए इसे बढ़ाकर 50 फीसदी करने की मांग की गई। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस की तर्ज पर हरियाणा पुलिस की नई भर्तियों में भी रिटायर्ड पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए 5 प्रतिशत का कोटा आरक्षित करने का प्रस्ताव एसपी के माध्यम से सरकार को भेजा गया है।
धरने के दौरान विभाग के पुराने दिग्गजों ने एकजुटता दिखाई, जिनमें सेवानिवृत्त डीएसपी रोनकी राम, जगदीश चंद्र सैनी, बृज मोहन समेत रिटायर्ड इंस्पेक्टर रामचंद्र, मेहर सिंह और राजकुमार जैसे कई वरिष्ठ नाम शामिल थे। पूर्व अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों और विभागीय जांच को पारदर्शिता से आगे नहीं बढ़ाया, तो संगठन आगे की रणनीति तैयार करने के लिए मजबूर होगा।

