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Loksabha Update: भाजपा ने कहा- सरकार कॉजपा के साथ बातचीत के लिए तैयार; विपक्ष परीक्षाओं को लेकर झूठा विमर्श फैला रहा

Loksabha Update: भाजपा ने कहा- सरकार कॉजपा के साथ बातचीत के लिए तैयार; विपक्ष परीक्षाओं को लेकर झूठा विमर्श फैला रहा

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज

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Loksabha Update: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व वाले आंदोलन से निपटने संबंधी केंद्र के तरीके का बचाव करते हुए बुधवार को कहा कि सरकार उस आंदोलन के प्रति ‘संवेदनशील’ बनी हुई है, जिसे छात्र आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया गया है और वह हमेशा बातचीत के लिए तैयार रही है। सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह यह झूठा विमर्श फैला रहा है कि भारत की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। भाजपा ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दल इन विरोध प्रदर्शनों से राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कॉजपा द्वारा शुरू किये गये आंदोलन को छात्र आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया गया और सरकार का इसके प्रति रुख हमेशा संवेदनशील रहा है।

उन्होंने कहा कि जब कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके छह जून को अमेरिका से लौटे तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें हवाई अड्डे से आगे जाने की अनुमति दी और शाम पांच बजे तक विरोध प्रदर्शन पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा इसलिए पुलिस ने किसी भी प्रकार की कोई बाधा उत्पन्न नहीं की।’’ स्वराज ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को बिना अनुमति के ‘‘संसद का घेराव’’ करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘20 जुलाई को संसद का घेराव करने का प्रयास किया गया। यह अराजकता का संकेत है। जब बिना किसी अनुमति के संसद का घेराव करने की कोशिश की गई, तब भी सरकार बातचीत के लिए तैयार रही।’’ उन्होंने दावा किया कि छह जून से 20 जुलाई के बीच प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत की मांग को लेकर कोई अनुरोध या संदेश नहीं आया।

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स्वराज ने दावा किया, ‘‘छह जून से 20 जुलाई तक बातचीत के लिए कोई अनुरोध या संदेश नहीं आया था। हालांकि, जैसे ही उन्होंने संदेश भेजा, सरकार ने तुरंत उन्हें जे. पी. नड्डा जी से मिलने और बातचीत करने के लिए आमंत्रित किया।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि नड्डा से मुलाकात के बाद प्रदर्शनकारियों ने सरकार को आश्वासन दिया था कि वे आंदोलन जारी नहीं रखेंगे, लेकिन वे अपने वादे पर कायम नहीं रहे। स्वराज ने आरोप लगाया, ‘‘उनसे फिर से अनुरोध किया गया था कि वे प्रदर्शन जारी न रखें। उन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि वे ऐसा नहीं करेंगे, लेकिन बाद में वे अपने वादे से मुकर गए। जब प्रदर्शन शुरू हुआ, तो उन्होंने एक-दो नहीं बल्कि अनगिनत झूठे विमर्श फैलाने शुरू कर दिए। उन्होंने अलग-अलग तरह की फर्जी खबरें फैलाने की कोशिश की।’’ उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर किए गए वे पोस्ट ‘झूठे’ थे, जिनमें आरोप लगाया गया था कि सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ दुर्व्यवहार किया गया, दीपके को गिरफ्तार कर लिया गया, 12 वर्षीय एक लड़की के सिर में चोट लगी और प्रदर्शन का मंच हटा दिया गया।

स्वराज ने आरोप लगाया, ‘‘तथ्य-जांच में ये दावे झूठे पाये गये। ऐसा प्रतीत हुआ कि सोशल मीडिया पर झूठा विमर्श फैलाने और प्रदर्शनकारियों को भड़काने के लिए जानबूझकर ऐसा किया गया था।’’ कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि उन्होंने संसदीय चर्चा के बजाय धरने प्रदर्शन का रास्ता चुना। उन्होंने कहा, ‘‘कल राहुल गांधी जंतर-मंतर नहीं गये। इसके बजाय, वह प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। हर कोई जानता है कि प्रधानमंत्री का आवास एक बहुत ही सुरक्षित क्षेत्र है। राहुल गांधी को खुद भी यह बात पता होनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने अपना बचपन वहीं बिताया है।’’ स्वराज ने कहा, ‘‘इस मुद्दे को उठाने के लिए उनके पास संसद का मंच था। लेकिन विपक्ष जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाना नहीं चाहता; वह केवल व्यवधान पैदा करना चाहता है।’’

उन्होंने विपक्षी दलों पर यह भी आरोप लगाया कि वे इस आंदोलन का श्रेय लेने के लिए आपस में होड़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कल आपने यह भी देखा कि विपक्ष खुद एकजुट नहीं है। आंदोलन का श्रेय किसे मिलेगा, इसे लेकर विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।’’ स्वराज ने कहा, ‘‘यह दर्शाता है कि यह आंदोलन वास्तव में छात्रों के हितों के बारे में नहीं है। यह केवल राजनीतिक अवसरवाद का एक उदाहरण है।’’ हाल में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित परीक्षाओं का जिक्र करते हुए स्वराज ने कहा कि इस एजेंसी ने पिछले तीन महीनों में सफलतापूर्वक राष्ट्रीय स्तर की तीन परीक्षाएं आयोजित की हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जेईई, सीयूईटी और नीट की पुन: परीक्षा आयोजित की गई है। इसलिए यह कहना कि भारत की शिक्षा व्यवस्था, विशेष रूप से परीक्षा प्रणाली, पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है, बिल्कुल गलत है। यह एक झूठ है। एक गलत धारणा फैलाई जा रही है।’’

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