Kaithal Sarpanch Termination: हरियाणा के कैथल जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां गांव ग्योंग की महिला सरपंच मनजीत कौर को पंचायती जमीन पर अवैध कब्जा करने के मामले में पद से बर्खास्त कर दिया गया है। गांव के ही एक ग्रामीण की शिकायत पर हुई गहन जांच में जब कब्जे की पुष्टि हुई, तो जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरपंच को पदमुक्त करने का फैसला सुनाया। इस कार्रवाई से जिले की पंचायती राजनीति में हड़कंप मच गया है।
प्रशासनिक आदेश के मुताबिक, पद से हटाए जाने के साथ ही मनजीत कौर पर भविष्य के लिए भी बड़ी पाबंदी लगा दी गई है। वे अब आगामी 6 वर्षों तक पंचायती राज संस्थाओं का कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगी। कानून के नियमों के तहत, गांव में विकास कार्यों को सुचारू रखने के लिए अब बहुमत वाले पंच को सरपंच पद की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, ताकि पंचायती काम प्रभावित न हों।
हुकम सिंह ने की थी डीसी से शिकायत, जांच में खुली कब्जे की पोल
इस पूरे मामले की शुरुआत गांव ग्योंग निवासी हुकम सिंह की एक शिकायत से हुई थी। हुकम सिंह ने प्रशासन के सामने यह मुद्दा उठाते हुए गंभीर आरोप लगाया था कि महिला सरपंच ने गांव की कीमती पंचायती जमीन पर अवैध कब्जा जमा रखा है। ग्रामीणों ने जब खुद सरपंच से जमीन खाली करने की अपील की, तो उन्होंने इसे साफ नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने सीधे उपायुक्त (डीसी) कैथल का दरवाजा खटखटाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसी ने तुरंत इसकी जांच अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) को सौंपी। इसके बाद एडीसी के निर्देश पर जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) ऋतु लाठर ने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की। डीडीपीओ की विस्तृत जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया कि सरपंच मनजीत कौर ने वास्तव में पंचायती जमीन पर कब्जा कर रखा था, जिसके बाद प्रशासनिक चाबुक चलना तय हो गया।
6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक, सरपंच पक्ष ने पत्र मिलने से किया इंकार
डीडीपीओ ऋतु लाठर ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि उच्च अधिकारियों के आदेश पर इस प्रकरण की जांच की गई थी। जांच में पंचायती जमीन पर अवैध कब्जे की बात सही पाए जाने के बाद ही सरपंच के टर्मिनेशन की कार्रवाई अमल में लाई गई है। उन्होंने साफ किया कि नियम उल्लंघन के चलते अब पूर्व सरपंच अगले 6 साल तक पंचायत चुनाव की प्रक्रिया से बाहर रहेंगी।
उधर, इस कड़े फैसले पर सरपंच मनजीत कौर और उनके प्रतिनिधि कर्मवीर सिंह का बयान भी सामने आया है। उन्होंने अपने बचाव में कहा कि फिलहाल उन्हें प्रशासन की तरफ से बर्खास्तगी से जुड़ा कोई लिखित आदेश या पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। सरपंच पक्ष का कहना है कि जब आधिकारिक पत्र उनके हाथ में आएगा, उसी के बाद वे कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर आगे की रणनीति और कार्रवाई का फैसला करेंगे।
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