Ludhiana News: लुधियाना नगर निगम की शक्तिशाली कमेटी से विधायक पुत्रों का इस्तीफा, 7 अगस्त को हाईकोर्ट में सुनवाई
Ludhiana News: लुधियाना नगर निगम की सबसे अहम मानी जाने वाली फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट्स कमेटी (F&CC) में आम आदमी पार्टी के दो विधायकों के बेटों की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में 7 अगस्त को प्रस्तावित सुनवाई से पहले विधायक मदन लाल बग्गा के पुत्र पार्षद अमन बग्गा और विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू के पुत्र पार्षद युवराज सिंह सिद्धू ने F&CC सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया।
यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब हाईकोर्ट ने इस मामले में लुधियाना के मेयर से एफिडेविट और F&CC द्वारा अब तक लिए गए फैसलों का जवाब मांगा था। अदालत में सुनवाई से पहले हुए इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है।
हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले बदला घटनाक्रम
कांग्रेस पार्षद गौरव भट्टी ने दोनों नियुक्तियों को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर 7 अगस्त को सुनवाई होनी है, जिसमें मेयर को अपना पक्ष और कमेटी के फैसलों का रिकॉर्ड अदालत में पेश करना था। इसी बीच दोनों विधायक पुत्रों के इस्तीफे सामने आने के बाद याचिकाकर्ता गौरव भट्टी ने इसे “संविधान और नियमों की जीत” बताया। उनका कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया के कारण यह मामला गंभीरता से सामने आया।
अमन बग्गा ने इस्तीफे में क्या कहा?
विधायक मदन लाल बग्गा के पुत्र और पार्षद अमन बग्गा ने अपने इस्तीफे में कहा कि उनकी नियुक्ति को विपक्ष के एक सदस्य ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामला अदालत में लंबित होने के कारण F&CC की बैठकें नहीं हो पा रही थीं और इससे लुधियाना के विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके लिए किसी भी पद से अधिक महत्वपूर्ण शहर का विकास है। इसी वजह से उन्होंने 30 जुलाई को ही पद छोड़ दिया था। उनके अनुसार उस समय सफाई कर्मचारियों का आंदोलन चल रहा था, इसलिए इस्तीफे की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
युवराज सिंह सिद्धू ने भी विकास को बताया प्राथमिकता
विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू के पुत्र और पार्षद युवराज सिंह सिद्धू ने अपने इस्तीफे में पार्टी नेतृत्व और मेयर का आभार जताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा उनकी नियुक्ति को अदालत में चुनौती दिए जाने के कारण F&CC की बैठकें प्रभावित हो रही थीं। युवराज सिंह सिद्धू ने कहा कि शहर का विकास किसी भी पद से बड़ा है। इसलिए उन्होंने सदस्य पद से इस्तीफा देकर विकास कार्यों में आ रही रुकावट दूर करने का निर्णय लिया।
नियुक्तियों पर क्या हैं कानूनी आपत्तियां?
याचिकाकर्ता कांग्रेस पार्षद गौरव भट्टी का कहना है कि पंजाब नगर निगम अधिनियम के अनुसार F&CC का गठन केवल चुने हुए पार्षदों की प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए और इसके सदस्यों का चयन सदन में चुनाव के माध्यम से होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायकों के बेटों को कमेटी में शामिल करना नगर निगम की कार्यप्रणाली में राजनीतिक हस्तक्षेप को बढ़ावा देता है। उनके अनुसार इससे नीतिगत फैसलों और विकास कार्यों में निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
‘एंटीसिपेशन अप्रूवल’ को लेकर भी उठाए सवाल
गौरव भट्टी ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि मेयर के माध्यम से ‘एंटीसिपेशन अप्रूवल’ का इस्तेमाल कर कुछ फाइलों और टेंडरों को जल्द मंजूरी दिलाई जा रही है, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में वह पहले ही मेयर और नगर निगम कमिश्नर को आगाह कर चुके हैं कि जब तक हाईकोर्ट का फैसला नहीं आता, तब तक इस प्रक्रिया के जरिए फाइलों को मंजूरी न दी जाए।
फिलहाल इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और अदालत में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों के बाद ही स्पष्ट होगा।
