Manisha Bhanwala Wrestling: हरियाणा की उपजाऊ और तपिश भरी मिट्टी ने देश को अनगिनत जांबाज पहलवान दिए हैं, लेकिन आज इस माटी की जिस बेटी ने कमाल किया है, उसने कुश्ती के इतिहास के पन्नों पर अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है। (Manisha Bhanwala news) कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में खेली जा रही (Senior Wrestling World Championship 2026 Astana) सीनियर रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 के खिताबी मुकाबले में मनीषा भनवाला ने वो कर दिखाया, जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने आखिरी पलों में की हो।
फाइनल मैच में अमेरिका की मजबूत पहलवान एबिगेल नेट के खिलाफ उतरते ही शुरुआती दौर में मुकाबला कठिन नजर आने लगा था। अमेरिकी खिलाड़ी ने आक्रामक दांवपेंच दिखाते हुए लगातार अंक बटोरे और एक समय स्कोर बोर्ड पर मनीषा 0-6 से पीछे हो चुकी थीं। भारतीय खेमे में मायूसी छाने लगी थी, लेकिन मनीषा के इरादे कुछ और ही तय करके आए थे।
छह अंकों के फासले को पाटा, अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी को चित कर चूमी जीत (Indian female wrestler gold medal)
जब बड़े-बड़े धुरंधर दबाव के आगे घुटने टेक देते हैं, तब चैंपियन खिलाड़ी अपनी असली क्षमता दिखाते हैं। मनीषा ने पीछे होने के बावजूद अपना मानसिक संतुलन नहीं खोया। उन्होंने धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन तालमेल बिठाते हुए वापसी का ताना-बाना बुना। एक-एक अंक जुटाकर उन्होंने स्कोर को 6-6 की बराबरी पर ला खड़ा किया।
मुकाबले के अंतिम क्षणों में जब सांसें थमी हुई थीं, तब भारतीय पहलवान ने ऐसा सटीक दांव लगाया कि अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी चारों खाने चित हो गई। देखते ही देखते स्कोर 8-6 हो गया और घड़ी की सुइयां थमते ही मैट पर तिरंगे के साथ मनीषा की जीत का जश्न शुरू हो गया। यह सिर्फ एक मुकाबला जीतना नहीं था, बल्कि जुझारू प्रवृत्ति की एक शानदार मिसाल थी।
सुशील कुमार के बाद यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल करने वाली देश की दूसरी पहलवान
इस ऐतिहासिक स्वर्ण पदक के साथ ही मनीषा ने एक ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है, जो आज तक देश की कोई महिला पहलवान नहीं कर पाई थी।
वह सीनियर विश्व चैंपियनशिप में देश के लिए गोल्ड जीतने वाली पहली महिला रेसलर बन गई हैं। उनसे पहले यह कारनामा केवल दिग्गज पहलवान सुशील कुमार ने साल 2010 में पुरुषों के 66 किलोग्राम वर्ग में किया था। पुरुष और महिला दोनों वर्गों को मिलाकर देखें तो इस प्रतिष्ठित खिताब को हासिल करने वाली वह देश की दूसरी ही पहलवान हैं। उनकी इस उपलब्धि से भारतीय कुश्ती फेडरेशन और खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है।
जींद के साधारण अखाड़े से लेकर विश्व पटल तक का सफर (Manisha Bhanwala biography)
इस मुकाम तक पहुंचना मनीषा के लिए आसान नहीं रहा। हरियाणा के जींद जिले के सिवाहा गांव में 10 फरवरी 1997 को जन्मी मनीषा का कुश्ती की दुनिया से जुड़ना भी एक संयोग था। साल 2013 में जब उनके पिता ने उन्हें शारीरिक फिटनेस सुधारने और वजन नियंत्रित करने के लिए अखाड़े की चौखट पर भेजा था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह बच्ची एक दिन दुनिया की सिरमौर बनेगी। अखाड़े की धूल में पसीना बहाते हुए उन्होंने अपनी तकनीक को निखारा।
उनके खेल का सफर लगातार सीढ़ियां चढ़ता गया। साल 2016 में कैडेट विश्व चैंपियनशिप और दक्षिण एशियाई खेलों में 60 किग्रा वर्ग का गोल्ड जीतने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 2018 के चीन विश्व सैन्य खेलों में स्वर्ण पदक, फिर 2022 से 2024 तक एशियाई चैंपियनशिप में लगातार तीन कांस्य पदक और साल 2025 में एशियाई चैंपियनशिप का गोल्ड अपने नाम कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का डंका बजा दिया था। अब अस्ताना में विश्व चैंपियन का ताज पहनकर उन्होंने अपने करियर के स्वर्णिम अध्याय की सबसे बड़ी इबारत लिख दी है।
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