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Manoj Bajpayee on Film Ban: फिल्मों को बैन करने की मांग पर भड़के मनोज बाजपेयी, दिया बेबाक बयान

Manoj Bajpayee on Film Ban: फिल्मों को बैन करने की मांग पर भड़के मनोज बाजपेयी, दिया बेबाक बयान

फिल्मों को बैन करने की मांग पर भड़के मनोज बाजपेयी, दिया बेबाक बयान

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GGaganpreet Kaur

Manoj Bajpayee on Film Ban: हिंदी सिनेमा जगत में इन दिनों फिल्मों का विरोध होना और उन पर पाबंदी लगाने की मांग उठना जैसे एक परिपाटी सी बन गई है। कभी किसी फिल्म की पटकथा पर अंगुली उठती है, तो कभी उसके किसी विशेष दृश्य या शीर्षक को लेकर विवाद खड़ा कर दिया जाता है। हालात कई बार इतने तल्ख हो जाते हैं कि निर्माताओं को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं या फिर फिल्म की रिलीज पर ही संकट के बादल मंडराने लगते हैं। कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इस दौर में अब मंझे हुए अभिनेता मनोज बाजपेयी ने इस पूरे परिदृश्य पर अपनी तीखी और खरी-खरी प्रतिक्रिया दी है।

हाल ही में ‘जूम’ को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में मनोज बाजपेयी से जब फिल्मों को बैन करने की बढ़ती प्रवृत्ति और सेंसर कल्चर को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में जवाब देकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

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मुख्यधारा की बहसों और ‘लोकप्रिय राय’ पर कटाक्ष

अपनी बेहतरीन अदायगी और संजीदा अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले मनोज बाजपेयी ने बातचीत के दौरान बेझिझक कहा कि मुख्यधारा के सिनेमा और सामाजिक मुद्दों पर हमेशा से बहसें होती आई हैं। उन्होंने कहा कि वे खुद भी इन ज्वलंत विषयों पर अपनी राय रखने से कभी पीछे नहीं हटे।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिनेता ने तंज कसते हुए कहा, “आमतौर पर जो ‘लोकप्रिय राय’ (Popular Opinion) समाज या एक खास वर्ग द्वारा गढ़ दी जाती है, मैंने हमेशा उसका विरोध किया है।” उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि कला के क्षेत्र में किसी एक तयशुदा एजेंडे या दबाव के तहत काम नहीं होना चाहिए, बल्कि हर कहानी को उसकी सहजता के साथ दर्शकों के सामने आने का मौका मिलना चाहिए।

विवादों के बीच मनोज बाजपेयी का बेबाक रुख

बता दें कि मनोज बाजपेयी ने अपने लंबे फिल्मी सफर में हमेशा लीक से हटकर यानी इंडिपेंडेंट और यथार्थवादी सिनेमा को तरजीह दी है। ‘सत्या’ से लेकर ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ और ‘भैया जी’ जैसी फिल्मों तक, उन्होंने हर बार अपनी कला के जरिए समाज के कड़े सच को पर्दे पर उतारा है। ऐसे समय में जब फिल्मों पर सेंसरशिप की तलवार लटकना और उन्हें प्रतिबंधित करने की मांग उठना आम हो चला है, मनोज बाजपेयी का यह बयान कला जगत में रचनात्मक स्वतंत्रता के पक्ष में एक मजबूत आवाज के रूप में देखा जा रहा है।

यह भी देखें – ‘मेरी बायोपिक बनी तो कई लोगों की डूब जाएगी साख’, सलमान खान के जवाब पर हंसी महफिल

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