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Maternal Death Rajasthan: भीलवाड़ा के एमजी अस्पताल में फिर दो प्रसूताओं की मौत, एक महीने में सात मामलों से बढ़ी चिंता

Maternal Death Rajasthan: भीलवाड़ा के एमजी अस्पताल में फिर दो प्रसूताओं की मौत, एक महीने में सात मामलों से बढ़ी चिंता

भीलवाड़ा महात्मा गांधी अस्पताल

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Maternal Death Rajasthan: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में महात्मा गांधी अस्पताल (एमजीएच) में दो और प्रसूताओं की मौत ने सरकारी अस्पतालों की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार देर रात हुई इन दोनों मौतों के बाद जुलाई महीने में अकेले इस अस्पताल में प्रसूताओं की मौत का आंकड़ा सात पहुंच गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दोनों महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी हुई थी और उन्हें हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में नहीं रखा गया था। डॉक्टरों के अनुसार दोनों मामलों में प्रसव के बाद अचानक अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट पार्टम हेमरेज) हुआ, जिसके कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। स्वास्थ्य विभाग ने दोनों मामलों की जांच शुरू कर दी है।

 

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शाहपुरा से रेफर की गई सुगना, रक्तस्राव के बाद बिगड़ी हालत

पहला मामला भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी क्षेत्र की रहने वाली 22 वर्षीय सुगना मोहन बैरवा का है। बुधवार रात शाहपुरा जिला अस्पताल में उनकी सामान्य प्रसूति हुई थी। परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के कुछ समय बाद उनका ब्लड प्रेशर तेजी से गिरने लगा। हालत गंभीर होने पर उन्हें महात्मा गांधी अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन आईसीयू में भर्ती करने के कुछ ही समय बाद उनकी मौत हो गई। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण गौड़ के अनुसार अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनका हीमोग्लोबिन 10 ग्राम से घटकर 1.8 ग्राम तक पहुंच गया था।

 

दूसरी प्रसूता को ऑपरेशन का मौका नहीं मिल सका

दूसरा मामला भीलवाड़ा शहर के पटेल नगर निवासी 18 वर्षीय रानी भूरा बंजारा का है। उनकी भी अस्पताल में सामान्य प्रसूति हुई थी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रसव के बाद अचानक अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। ऐसे मामलों में पहले दवाओं से रक्तस्राव नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर गर्भाशय निकालने का ऑपरेशन किया जाता है, लेकिन इस मामले में स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी कि ऑपरेशन का अवसर ही नहीं मिल पाया।

 

स्वास्थ्य विभाग करेगा दोनों मामलों की विस्तृत जांच

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) संजीव शर्मा ने बताया कि दोनों महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में शामिल नहीं थीं। प्रसव के बाद अचानक जटिलताएं सामने आईं, जिनकी वजह से उनकी मौत हुई। उन्होंने कहा कि दोनों मामलों की केस हिस्ट्री, सोनोग्राफी रिपोर्ट, उपचार प्रक्रिया और मृत्यु के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि प्रसव के बाद निगरानी और आपातकालीन उपचार में कहीं कोई कमी तो नहीं रही।

 

भीलवाड़ा में 23 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में

हाल ही में जिले में चलाए गए विशेष स्क्रीनिंग अभियान के दौरान एक सप्ताह में 2,210 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें लगभग 500 महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में पाई गईं। इन महिलाओं में गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय और किडनी संबंधी बीमारियां, पूर्व सिजेरियन, जुड़वां गर्भ और अन्य जटिल चिकित्सीय स्थितियां शामिल हैं। हालांकि, हाल में जिन महिलाओं की मौत हुई, उनमें कई हाई रिस्क श्रेणी में नहीं थीं, जिससे प्रसव के बाद होने वाली जटिलताओं पर भी सवाल उठ रहे हैं।

 

तीन महीनों में प्रदेश में 16 प्रसूताओं की मौत

राजस्थान में पिछले तीन महीनों के दौरान सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के कई मामले सामने आए हैं। मई में कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत हुई थी। जून में बीकानेर में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद छह महिलाओं की किडनी फेल होने के मामले सामने आए थे, जिनमें दो महिलाओं की इलाज के दौरान मौत हो गई। जुलाई में भीलवाड़ा के अलावा बांसवाड़ा में भी दो प्रसूताओं की उपचार के दौरान मौत दर्ज की गई। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आपातकालीन प्रसूति प्रबंधन को लेकर बहस तेज हो गई है।

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