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Monsoon Health Alert: बारिश के मौसम में सीलन से खराब हो सकती हैं दवाइयां, डॉक्टर से जानें सुरक्षा के उपाय

Monsoon Health Alert: बारिश के मौसम में सीलन से खराब हो सकती हैं दवाइयां, डॉक्टर से जानें सुरक्षा के उपाय

बारिश के मौसम में सीलन से खराब हो सकती हैं दवाइयां

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GGaganpreet Kaur

Monsoon Health Alert: बारिश का मौसम आते ही हम अपने खान-पान और पहनावे का तो खास ख्याल रखते हैं, लेकिन अक्सर अलमारी या दराज में रखी दवाइयों पर हमारा ध्यान नहीं जाता। मानसून के दिनों में हवा में नमी का स्तर (Humidity) काफी बढ़ जाता है। यह सीलन न केवल घर की दीवारों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि आपकी जरूरी दवाओं का असर भी चुपचाप खत्म कर सकती है। कई बार लोग महीनों से एक ही जगह रखी गोलियों का सेवन करते रहते हैं, यह सोचे बिना कि नमी ने उनकी गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाया है।

यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के सीनियर कंसल्टेंट जनरल फिजिशियन डॉ. के. सेशी किरण के अनुसार, दवा को समय पर खाने जितना ही जरूरी उसे सही माहौल में संभालकर रखना भी है। बारिश के मौसम में बरती गई छोटी सी बेपरवाही आपकी सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।

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एक्सपायरी डेट बाकी, फिर भी क्यों बेअसर हो जाती है दवा?

डॉ. के. सेशी किरण बताते हैं कि बहुत सी दवाइयां हवा में मौजूद नमी को तेजी से सोख लेती हैं। इस प्रक्रिया में दवा के रासायनिक तत्व प्रभावित होते हैं और उनकी काम करने की क्षमता घटने लगती है।

अक्सर मरीज यह सोचते हैं कि अगर स्ट्रिप पर छपी एक्सपायरी डेट में अभी वक्त बाकी है, तो दवा पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, यह सोच गलत हो सकती है। अगर दवा लंबे समय तक सीलन भरे माहौल में रही है, तो उसकी ताकत तय तारीख से काफी पहले ही खत्म हो सकती है।

इन दवाइयों को सीलन से बचाना सबसे ज्यादा जरूरी

हर दवा पर नमी का असर एक जैसा नहीं होता, लेकिन कुछ दवाइयां इसके प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं।

सामान्य टैबलेट और कैप्सूल

पानी में घोलकर पी जाने वाली घुलनशील गोलियां (Effervescent tablets)

पाउडर आधारित दवाएं और ओआरएस

प्रोबायोटिक्स और कुछ खास एंटीबायोटिक्स

मल्टीविटामिन सप्लीमेंट्स

अगर इन दवाओं को नमी से न बचाया जाए, तो यह शरीर में जाकर अपना पूरा असर नहीं दिखा पाती हैं।

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किसी दवा का इस्तेमाल करने से पहले उसकी भौतिक स्थिति जांचना बेहद जरूरी है। अगर आपको दवा में ये बदलाव दिखें, तो उसका सेवन तुरंत बंद कर दें:

चिपचिपाहट या नरमी: स्ट्रिप से निकालते वक्त अगर गोली हाथ में चिपक रही हो या जरूरत से ज्यादा नरम हो गई हो।

रंग में बदलाव: गोली या कैप्सूल का असली रंग फीका पड़ गया हो या उस पर धब्बे दिख रहे हों।

बनावट बिगड़ना: दवा अपने आप टूटने या झड़ने लगी हो।

अजीब गंध: दवा की शीशी या पैकेट से अचानक अजीब सी गंध आने लगे।

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डॉक्टर के मुताबिक, बारिश के दिनों में दवाइयों को सुरक्षित रखने के लिए कुछ बुनियादी नियमों का पालन करना चाहिए:

ओरिजिनल पैकिंग में रखें: दवाइयों को बार-बार उनके मूल रैपर या बोतल से निकालकर किसी दूसरे डिब्बे में न पलटें।

सही जगह का चुनाव: दवाइयों को कभी भी किचन या बाथरूम में न रखें, क्योंकि इन जगहों पर भाप और नमी सबसे ज्यादा होती है। घर की किसी सूखी, अंधेरी और ठंडी अलमारी में ही मेडिसिन बॉक्स रखें।

सूखे हाथों का इस्तेमाल: गीले या नम हाथों से कभी भी दवा न निकालें।

फ्रिज का सही इस्तेमाल: लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखने से हर दवा सुरक्षित रहती है, जो कि गलत है। केवल उन्हीं दवाओं को फ्रिज में रखें जिनके रैपर पर साफ तौर पर 2°C से 8°C के बीच स्टोर करने की हिदायत दी गई हो।

बोतल का ढक्कन कसकर बंद करें: सिरप या ड्रॉप्स का इस्तेमाल करने के तुरंत बाद ढक्कन को अच्छी तरह बंद कर दें।

सही तरीके से रखी गई दवा ही वक्त पर सही असर दिखाती है। अगर किसी दवा के रखरखाव को लेकर मन में जरा सा भी संदेह हो, तो तुरंत अपने फार्मासिस्ट या डॉक्टर से संपर्क करें।

यह भी पढ़ें– होम्योपैथी दवा लेते समय न करें ये 5 गलतियां

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