Narnaul: धर्म एवं संस्कारों की शिक्षा को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने के उद्देश्य से नारनौल जैन मंदिर में आयोजित पूजन-पाठ एवं शिक्षा शिविर में चौथे दिन श्रद्धालुओं एवं बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। शिविर में भगवान की पूजा-विधि का विधिवत प्रशिक्षण देते हुए प्रतिभागियों को धार्मिक क्रियाओं के साथ उनके आध्यात्मिक महत्व से भी अवगत कराया गया। यह शिविर आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज से दीक्षित आचार्य श्री 108 आर्जव सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 महात सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 विभोर सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 सानंद सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित किया जा रहा है।
शिविर का आयोजन ब्रह्मचारिणी दीदी चेतना जी एवं ब्रह्मचारी भैया डॉ. विजय जी जैन द्वारा किया जा रहा है। पूजा-विधि के साथ बताए धार्मिक संस्कारों के महत्व शिविर के चौथे दिन भगवान की पूजा का प्रशिक्षण देते हुए पूजा की विधि, नियम एवं धार्मिक परंपराओं के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों एवं बड़ों ने पूरे उत्साह के साथ इसमें भाग लिया। शिविर में पूजन-पाठ के अलावा धार्मिक संस्कार, आध्यात्मिक चिंतन और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों की शिक्षा भी दी जा रही है। बच्चों में धार्मिक ज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी करवाई जा रही हैं। प्रतियोगिताओं में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाने के लिए लकी ड्रा का भी आयोजन किया गया।
प्रवक्ता सुरेन्द्र जैन ने कहा कि ने बताया कि इस सात दिवसीय शिविर में बच्चों ने जैन धर्म की महत्वपूर्ण पूजा विधियों को न केवल सीखा, बल्कि श्रद्धा के साथ उनका अभ्यास भी किया. उन्हें ध्वज दर्शन, धूप पूजा, केसर तिलक, अक्षत पूजा, नैवेद्य पूजा, फल पूजा और दीप पूजा जैसी पूजन विधियों का गहन ज्ञान दिया गया. साथ ही, जैन मंदिर में प्रवेश के नियम, आचार-व्यवहार और पूजा की शुद्ध विधियों को भी समझाया गया। आध्यात्मिक और बौद्धिक विकास पर विशेष जोर शिविर के दौरान बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास के लिए कई सत्र आयोजित किए गए, इनमें योग, ध्यान, ब्रेन गेम्स, स्वस्तिक और गहवाली बनाने की कला, कथा वाचन और संगीत की मूलभूत शिक्षा शामिल थी. इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, संवाद कौशल और रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया गया।
इस अवसर पर गोपाल जैन, मोक्ष जैन, गर्व जैन, गर्वित जैन, पल्लवित जैन, आर्जव जैन, अथर्व जैन, पारस जैन, वृषभ जैन, सोनम जैन, वैष्णवी जैन, नेहा जैन, पुरवेश जैन, निकुंज जैन, पलक जैन, मोनिका जैन, अनिता जैन, कविता जैन, दिशा सहित अनेक गणमान्य लोग एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालु उपस्थित रहे।

