Narnaul: बाबा खेतानाथ आयुष कॉलेज के विद्यार्थियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने पिछले करीब 15 वर्षों से स्टाइपेंड में बढ़ोतरी नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए सरकार से इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की। प्रदर्शनकारी विधार्थियों का कहना है कि आयुष विद्यार्थियों को साढ़े चार वर्ष की पढ़ाई के बाद एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होती है। इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पताल में मरीजों के उपचार सहित विभिन्न चिकित्सकीय कार्यों में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड लंबे समय से वहीं पर ही अटका हुआ है।
महंगाई बढ़ी, लेकिन स्टाइपेंड वहीं का वहीं
छात्रों ने कहा कि वर्ष 2011 में निर्धारित किया गया स्टाइपेंड आज भी उसी स्तर पर है, जबकि पिछले 15 वर्षों में महंगाई काफी बढ़ चुकी है। बाहर से पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों को कमरा, भोजन, परिवहन और पढ़ाई से जुड़े खर्चों के लिए हर महीने बड़ी रकम की आवश्यकता होती है। ऐसे में मौजूदा स्टाइपेंड उनकी जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है। छात्रों का कहना है कि एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की जा चुकी है, जबकि आयुष विद्यार्थियों को अभी भी पुरानी राशि दी जा रही है। उनका सवाल है कि जब चिकित्सा क्षेत्र में इंटर्न के तौर पर जिम्मेदारियां निभाने में वे भी योगदान दे रहे हैं, तो उनके स्टाइपेंड में समान रूप से बढ़ोतरी क्यों नहीं की जा रही। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने सरकार से उनकी मांग पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। उनका कहना है कि वे किसी अतिरिक्त सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि ऐसा स्टाइपेंड चाहते हैं जिससे इंटर्नशिप के दौरान होने वाले मूलभूत खर्चों के लिए उन्हें परिवार पर निर्भर न रहना पड़े। बच्चों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांग पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेंगे। बाबा खेतानाथ आयुष कॉलेज नारनौल के विद्यार्थियों का कहना है कि 15 साल से लंबित स्टाइपेंड बढ़ोतरी अब केवल मांग नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक जरूरत बन चुकी है।
Narnaul: स्टाइपेंड बढ़ने की मांग पर पटीकरा आयुष कॉलेज के विधार्थियों का प्रदर्शन

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