July 31, 2026

राम रहीम फिर आया जेल से बाहर; मिली 30 दिनों की पैरोल, भारी सुरक्षा के बीच पहुंचा सिरसा डेरा

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 सिरसा। हरियाणा की सियासत और सामाजिक हलकों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। वजह है— डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह का एक बार फिर जेल से बाहर आना। साध्वियों के यौन शोषण और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या जैसे बेहद संगीन मामलों में रोहतक की सुनारिया जेल में उम्रकैद काट रहे राम रहीम को प्रशासन ने एक बार फिर 30 दिनों की पैरोल दे दी है। मंगलवार की सुबह जैसे ही रिहाई के कानूनी कागजात जेल प्रशासन तक पहुंचे, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राम रहीम की रवानगी सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए कर दी गई। सिरसा में कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए डेरा सच्चा सौदा के चारों तरफ अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर पूरे इलाके को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है।

शर्तों के दायरे में बीतेगा एक महीना; खुफिया एजेंसियां अलर्ट

जेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राम रहीम को यह पैरोल ऐसे ही नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे शर्तों की एक लंबी फेहरिस्त है। सिरसा आश्रम में रहने के दौरान राम रहीम किसी भी तरह की भड़काऊ बयानबाजी नहीं कर सकेगा और न ही बिना अनुमति के डेरा परिसर से बाहर जा सकेगा।

स्थानीय प्रशासन और खुफिया तंत्र को बकायदा आदेश दिए गए हैं कि डेरा मुख्यालय के भीतर आने-जाने वाले हर शख्स की सघन चेकिंग की जाए। राम रहीम की हर गतिविधि की रीयल-टाइम रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी, ताकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई चूक न होने पाए।

कानूनी अधिकार या राजनीतिक मेहरबानी? फिर छिड़ी नई बहस

राम रहीम का बार-बार जेल से बाहर आना हमेशा से ही विवादों और तीखी बहसों का केंद्र रहा है। इस बार भी जैसे ही पैरोल की खबर सार्वजनिक हुई, सामाजिक संगठनों और विपक्षी खेमे में उबाल आ गया। विरोधियों का सीधा आरोप है कि रेप और मर्डर जैसे जघन्य अपराधों के दोषी को बार-बार इतनी उदारता से पैरोल देना न्याय प्रणाली और पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।

सरी तरफ, सरकार, जिला प्रशासन और राम रहीम के वकीलों का पैनल इस पूरे मामले पर अलग दलील दे रहा है। उनका कहना है कि पैरोल या फरलो पाना किसी भी कैदी का बुनियादी और कानूनी अधिकार है, जो हरियाणा जेल नियमावली के तहत तय नियमों के अनुसार ही दिया जाता है। वकीलों के मुताबिक, राम रहीम का जेल के भीतर आचरण (कंडक्ट) सही रहा है, इसलिए नियमानुसार ही उसे यह राहत दी गई है और इसमें किसी भी तरह के विशेषाधिकार या वीआईपी ट्रीटमेंट का इस्तेमाल नहीं हुआ है। बहरहाल, विवाद चाहे जो भी हों, 30 दिनों की यह मियाद खत्म होते ही गुरमीत राम रहीम को दोबारा रोहतक की सुनारिया जेल की सलाखों के पीछे लौटना ही होगा।

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