July 29, 2026

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: 1 October से बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट के नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, बढ़ेंगी मुश्किलें

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हरियाणा। दिल्ली से सटे हरियाणा के जिलों में हर साल सर्दियों के दस्तक देते ही हवा का दम घुटने लगता है। इस बार ग्रैप (GRAP) लागू होने वाले संकट के दिनों का इंतजार करने के बजाय, नायब सिंह सैनी सरकार ने अभी से चौतरफा घेराबंदी शुरू कर दी है। मुख्य सचिव के स्तर पर हुई समीक्षा बैठक के बाद प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियमों को ताक पर रखकर सड़कों पर धुआं उड़ाने वाले वाहनों की अब खैर नहीं होगी।

सरकार का सबसे बड़ा प्रहार ईंधन की आपूर्ति पर हुआ है। आगामी 1 अक्टूबर से यदि आपकी कार या बाइक का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका है, तो आपको एनसीआर के किसी भी फ्यूल स्टेशन पर एक बूंद भी पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। इसके लिए बकायदा सभी 2,780 पेट्रोल पंप संचालकों को सख्त गाइडलाइंस जारी की जा रही हैं।

रोज जब्त होंगी 100 खटारा गाड़ियां; परिवहन विभाग को मिले कड़े आदेश

सड़कों पर दौड़ रहे ‘टाइम-बार्ड’ यानी 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को बाहर करने के लिए परिवहन विभाग ने अपनी रणनीति आक्रामक कर दी है। मुख्य सचिव के निर्देशानुसार, अब हर दिन कम से कम 100 खटारा वाहनों को सड़क से उठाकर सीधे स्क्रैप या सीज करने का टारगेट सेट किया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चालू वर्ष के शुरुआती चार महीनों (जनवरी से अप्रैल) के भीतर ही हजारों गाड़ियों पर यह गाज गिर चुकी है, और अब इस ड्राइव को और तेज किया जाएगा।

इसके साथ ही, राज्य सरकार ने जोमैटो, स्विगी, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी डिलीवरी व ई-कॉमर्स कंपनियों के बेड़े को नियंत्रित करने के लिए ‘वाहन एग्रीगेटर नीति’ को नोटिफाई कर दिया है। इसके तहत इन कंपनियों के वाहनों के लिए एक विशेष रजिस्ट्रेशन वेब पोर्टल लाइव कर दिया गया है, ताकि इनके कमर्शियल वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नजर रखी जा सके।

आसमान पर ‘तीसरी आंख’ का पहरा: उद्योगों की चिमनियों से लेकर सड़कों का कायाकल्प

प्रदूषण के खिलाफ यह जंग सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक इलाकों में भी बड़े पैमाने पर तकनीकी बदलाव किए गए हैं: चिमनियों से निकलने वाले धुएं की लाइव चेकिंग के लिए ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) से कुल 1,349 फैक्ट्रियों को जोड़ा जाना था, जिनमें से 1,286 इकाइयों की सीधी निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने अपने हाथ में ले ली है। जरा सी भी गड़बड़ी होने पर सीधे फैक्ट्री का चालान या उसे सील करने की कार्रवाई होगी।

हवा की शुद्धता मापने का इंफ्रास्ट्रक्चर: धूल रोकने को बनीं नई सड़कें

मुख्य सचिव के अनुसार, राज्य में हवा की शुद्धता को रीयल-टाइम ट्रैक करने के लिए 45 ‘कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन’ (CAAQMS) स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें से 22 स्टेशन ग्राउंड पर काम करना शुरू कर चुके हैं। बाकी बचे 23 स्टेशनों को 15 जून तक इंस्टॉल कर लिया जाएगा और 30 सितंबर की डेडलाइन तक सभी 45 स्टेशन पूरी तरह ऑपरेशनल मोड में आ जाएंगे।

इसके अतिरिक्त, सड़कों से उड़ने वाले डस्ट पार्टिकल्स (धूल) को रोकने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के सौजन्य से एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरा किया गया है। इसके तहत ₹2,953 करोड़ से अधिक का बजट फूंककर 1,164.31 किलोमीटर लंबी ग्रामीण और मुख्य सड़कों को पूरी तरह पक्का (नॉन-डस्टिंग) किया गया है। साफ है कि हरियाणा इस बार पराली और सर्दियों के स्मॉग से निपटने के लिए ‘शॉक थेरेपी’ वाले मोड में आ चुका है।

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