Jhajjar News: झज्जर में बड़ा हादसा, बंद कुएं में बछड़े को बचाने उतरे 4 लोगों की जहरीली गैस से मौत
50 साल पुराने कुएं में छिपा था मौत का जाल, झज्जर में गैस पॉइजनिंग से 4 युवकों ने गंवाई जान
Jhajjar News: हरियाणा का झज्जर जिला रविवार की शाम एक बेहद हृदयविदारक हादसे का गवाह बना, जिसने पूरे मुनीमपुर गांव में मातम पसरा दिया। एक लाचार बछड़े को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकालने की मानवीय संवेदना उस वक्त भारी पड़ गई, जब एक-एक कर चार लोग काल के गाल में समा गए। गांव के बाहरी हिस्से में स्थित करीब 40 से 50 साल पुराने एक बंद पड़े गहरे कुएं में यह हादसा पेश आया।
सूचना मिलते ही झज्जर की पुलिस आयुक्त (सीपी) राजश्री सिंह ने प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचकर तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करवाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। भारी मशक्कत के बाद चारों को कुएं से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
दलदल बन गया कुआं; जब दो साथी नहीं लौटे, तो बचाने कूदे दो और मददगार
झज्जर के सदर थाना प्रभारी (एसएचओ) इंस्पेक्टर परमजीत ने सोमवार को घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए बताया कि यह पुराना कुआं सालों से बंद पड़ा था और इसके भीतर भारी मात्रा में कचरा और जहरीली गैसें जमा हो चुकी थीं। रविवार शाम एक बछड़ा अचानक अनियंत्रित होकर इस कुएं में गिर गया।
पशु की जान बचाने के लिए गांव के दो युवक हिम्मत दिखाकर कुएं के भीतर उतरे। नीचे उतरते ही जहरीली गैस के तीखे प्रभाव के कारण वे चंद मिनटों में अचेत हो गए। जब काफी देर तक अंदर से कोई हलचल नहीं हुई और वे बाहर नहीं आए, तो बाहर खड़े दो अन्य लोग (जिनमें एक प्रवासी मजदूर भी शामिल था) अपने साथियों को बचाने के लिए रस्सी के सहारे नीचे उतरे। दुर्भाग्य से, कुएं के भीतर ऑक्सीजन का स्तर न के बराबर था और गैस इतनी घातक थी कि वे दोनों भी खुद को संभाल नहीं पाए और अंदर ही ढेर हो गए।
मुनीमपुर गांव के तीन लाल और एक प्रवासी मजदूर की मौत, बछड़ा भी नहीं बचा
गाड़ी के हॉर्न और चीख-पुकार के बाद जब गांव के अन्य लोग मौके पर जमा हुए, तो तुरंत पुलिस को इसकी इत्तला दी गई। स्थानीय प्रशासन ने दमकल विभाग और राहत कर्मियों की मदद से बेहद सावधानी से चारों शवों को बाहर निकाला।
एसएचओ परमजीत के मुताबिक, मृतकों की पहचान स्थानीय निवासी मोनू, दलबीर और नरेंद्र के रूप में हुई है, जबकि चौथा शख्स रामू था, जो यहां मजदूरी करने आया था। इस दर्दनाक हादसे में उस अभागे बछड़े को भी नहीं बचाया जा सका, वह भी कुएं के भीतर मृत पाया गया।
प्रशासनिक लापरवाही और पुराने कुओं का खतरा फिर आया सामने
इस हादसे ने ग्रामीण इलाकों में बरसों से बिना मुंडेर या बिना ढके पड़े पुराने कुओं और बावडियों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। झज्जर पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि बंद पड़े कुओं के निचले हिस्से में हवा की आवाजाही बंद होने से मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जानलेवा गैसें जमा हो जाती हैं,
जहां बिना सुरक्षा उपकरणों के जाना सीधे मौत को दावत देने जैसा है। पुलिस ने चारों शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। मुनीमपुर गांव में इस वक्त हर आंख नम है और चारों घरों में चूल्हे तक नहीं जले हैं।
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